मध्यप्रदेश में घट रहा है स्कूलों का रिटेन रेट, राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे हुआ राज्य, बच्चों की पढ़ाई अधर में
मध्य प्रदेश में स्कूलों के मर्जर और कम छात्रों के चलते 11 लाख से अधिक बच्चे ड्रॉपबॉक्स में हैं। 12वीं तक आते-आते 62% बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं।
मध्य प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में नित नए प्रयोगों और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक बनी हुई है। कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक स्कूलों को बंद करने और स्कूलों के मर्जर (विलय) के फैसलों के कारण प्रदेशभर में लाखों बच्चों की पढ़ाई अधर में लटक गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते सत्र में राज्य के स्कूलों से 15.25 लाख बच्चे गायब रहे, वहीं चालू सत्र में 11.12 लाख बच्चों को 'ड्रॉपबॉक्स' (Dropbox) में डाल दिया गया है। 'ड्रॉपबॉक्स' में ऐसे छात्रों को शामिल किया जाता है, जिन्होंने पुराना स्कूल तो छोड़ दिया है लेकिन किसी नए विद्यालय में अपना दाखिला नहीं लिया है।
📊 यूडाइस (UDISE) रिपोर्ट का खुलासा: राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे हुआ मप्र, 37.3% ही रह गया स्कूल में टिके रहने का रेट
यूडाइस (UDISE) की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में पहली से 12वीं कक्षा तक का 'रिटेन Rate' (यानी स्कूल में टिके रहने की दर) गिरकर महज 37.3 प्रतिशत रह गया है, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 51.9 प्रतिशत है। इसका सीधा और स्पष्ट अर्थ यह है कि राज्य में 62.7 प्रतिशत बच्चे 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने से पहले ही स्कूल छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। दूसरी ओर, शिक्षा पोर्टल पर 2025-26 के लिए नामांकित छात्रों की संख्या 1.35 करोड़ दर्ज है, जबकि यूडाइस रिपोर्ट में यह आंकड़ा 1.52 करोड़ बताया गया है। 17 लाख के इस बड़े अंतर पर अधिकारियों का तर्क है कि यूडाइस में प्री-प्राइमरी का डेटा भी जुड़ा होता है।
🚶♂️ दूरी बनी बच्चों की पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा, इंदौर और मुरैना में सबसे ज्यादा ड्रॉपबॉक्स छात्र
कम नामांकन का हवाला देकर प्राथमिक विद्यालयों को बंद किए जाने से बच्चों के लिए स्कूल की दूरी बढ़कर 1 से 5 किलोमीटर तक हो गई है। परिवहन के साधन न होने और सुरक्षा कारणों से गरीब परिवारों के लिए बच्चों को दूर भेजना मुश्किल हो रहा है, जिसके चलते उन्हें पढ़ाई छुड़ानी पड़ रही है। ड्रॉपबॉक्स के आंकड़ों के लिहाज से संख्या के आधार पर इंदौर (45,233), मुरैना (44,456), ग्वालियर (40,663), भोपाल (38,072) और सागर (35,953) सबसे आगे हैं। वहीं प्रतिशत के आधार पर मऊगंज (12.64%), मुरैना (11.13%), अलीराजपुर (10.04%), अशोकनगर (9.84%) और श्योपुर (9.78%) शीर्ष पांच जिलों में शामिल हैं। हाईस्कूल स्तर पर कुल ड्रॉपआउट दर 13% दर्ज की गई है, जिसमें 14.7% छात्र और 11.3% छात्राएं शामिल हैं।
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