एमआर-5 के अधूरे निर्माण पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट सख्त, निगमायुक्त और आईडीए सीईओ को नोटिस जारी
इंदौर में एमआर-5 के आधे-अधूरे निर्माण को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने निगमायुक्त और आईडीए सीईओ को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है।
मध्य प्रदेश के इंदौर में बहुप्रतीक्षित एमआर-5 के आधे-अधूरे और सुस्त निर्माण को लेकर अब हाई कोर्ट का रुख सख्त हो गया है। अदालत में एमआर-5 के अधूरे पड़े निर्माण कार्य को लेकर एक अवमानना याचिका प्रस्तुत की गई थी, जिसकी सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने इंदौर निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और आईडीए (IDA) के सीईओ परीक्षित झाड़े को आधिकारिक नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दोनों शीर्ष अधिकारियों से कड़े शब्दों में पूछा है कि अदालत के स्पष्ट आदेशों का पालन न करने पर क्यों न उनके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए और उन्हें चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
🛣️ वर्षों से लटका है पितृ पर्वत से सुपर कॉरिडोर तक का मार्ग, मास्टर प्लान के अनुसार काम पूरा करने की थी मांग
प्रस्तावित एमआर-5 सड़क पितृ पर्वत के पास से शुरू होकर सुपर कॉरिडोर होते हुए इंदौर वायर फैक्ट्री तक जानी है, लेकिन सालों बीत जाने के बावजूद इसका काम अब तक अधूरा पड़ा है। कई हिस्से तो ऐसे हैं जहाँ निर्माण कार्य आज तक शुरू ही नहीं हो पाया है। इस स्थिति से परेशान होकर पूर्व में हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें छोटा बांगड़दा रोड (एमआर-5) का निर्माण मास्टर प्लान के मुताबिक शीघ्र पूरा कराने, क्षेत्र में अवैध और बिना लाइसेंस के चल रहे स्लाटर हाउस के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा जनस्वास्थ्य एवं यातायात सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने की प्रमुख मांग उठाई गई थी।
🏛️ नगर निगम और आईडीए के आपसी विवाद में अटका प्रोजेक्ट, कोर्ट के आदेश की अनदेखी पर बढ़ा शिकंजा
सुनवाई के दौरान पूर्व में यह बात सामने आई थी कि सड़क के एक बड़े हिस्से का निर्माण होना अभी बाकी है। जहाँ याचिकाकर्ता का आरोप था कि अधिकारी बिना किसी ठोस कारण के जानबूझकर सड़क का काम अटका रहे हैं, वहीं शासन की तरफ से नगर निगम और आईडीए के बीच आपसी विवाद का हवाला दिया गया था। उस समय कोर्ट ने दोनों निकायों को यह तय करने का निर्देश दिया था कि सड़क निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकरण कौन है और प्राधिकरण तय होते ही काम शुरू करने के आदेश दिए थे। लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई न होने पर अब यह अवमानना याचिका दायर की गई है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
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