पत्नी के निधन के बाद मिला अकेलापन, ग्वालियर के इन 'गुरुजी' ने गरीब बच्चों को समर्पित कर दी जिंदगी
ग्वालियर के रिटायर्ड बैंक मैनेजर मोहनलाल अहिरवार 1200 से अधिक गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रहे हैं। जानिए उनकी प्रेरणादायक जीवन यात्रा।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में एक ऐसे अनूठे शिक्षक रहते हैं, जिन्हें हर कोई प्यार से 'बैंक मैनेजर गुरुजी' के नाम से जानता है। सबसे खास बात यह है कि मोहनलाल गुरुजी हर दिन लगभग 1200 गरीब और जरूरतमंद बच्चों को पूरी तरह निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। शिक्षक दिवस के इस खास अवसर पर हम आपको हरिशंकरपुरम में रहने वाले मोहनलाल अहिरवार की संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने अपनी पत्नी के देहांत के बाद अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए अपना पूरा जीवन उन गरीब बच्चों के नाम कर दिया जो पढ़ना तो चाहते हैं लेकिन आर्थिक तंगी के कारण सक्षम नहीं हैं।
🏦 गरीबी में बीता बचपन, 20 रुपये महीने की नौकरी से की शुरुआत और फिर बने बैंक मैनेजर
ग्वालियर के हरिशंकरपुरम निवासी मोहनलाल अहिरवार एक राष्ट्रीयकृत बैंक से रिटायर्ड मैनेजर हैं, जिन्होंने जीवन में शिक्षा के महत्व को हमेशा सर्वोपरि माना है। उन्होंने अपने बचपन का वह दौर देखा है जब उनका परिवार भारी आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। उनके पिता झांसी में महज 60 रुपये महीना कमाकर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण करते थे। जब उन्होंने होश संभाला तो हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान घर का बोझ बांटने के लिए शहर के एक क्लब में 20 रुपये महीने की नौकरी की, लेकिन अपनी पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया। कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने बैंक में नौकरी हासिल की और अंततः बैंक मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए।
💔 पत्नी के निधन के बाद मिला अकेलापन, झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों को पढ़ाने का लिया संकल्प
रिटायरमेंट से ठीक पहले वर्ष 2021 में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मोहनलाल की पत्नी उमा का निधन हो गया था, जिससे वे पूरी तरह अकेले पड़ गए। एक दिन मॉर्निंग वॉक के दौरान उन्होंने एक ब्रिज के नीचे बुजुर्ग समाजसेवी ओपी दीक्षित द्वारा चलाई जा रही बच्चों की क्लास देखी और खुद भी उससे जुड़ गए। रिटायरमेंट के बाद वे पूरी तरह इसी कार्य में रम गए। आज वे समिति के माध्यम से शहर के विभिन्न स्थानों पर लगभग 1200 बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वे बच्चों को न केवल शिक्षा देते हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उन्हें कॉपियां, किताबें और स्कूल फीस भरने में भी आर्थिक मदद करते हैं ताकि कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे।
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