ग्वालियर स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स भर्ती घोटाला, 151 अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति से बजट खत्म

ग्वालियर स्वास्थ्य विभाग में 151 अतिरिक्त आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती से बड़ा संकट। सितंबर तक का वेतन बजट जून में ही खत्म, जांच में खुली अनियमितताओं की पोल।

Sep 13, 2026 - 11:07
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ग्वालियर स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स भर्ती घोटाला, 151 अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति से बजट खत्म

ग्वालियर। ग्वालियर के स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती में हुई कथित गंभीर अनियमितताओं का असर अब सीधे कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर पड़ने लगा है। स्वीकृत पदों से अधिक संख्या में कर्मचारियों की अवैध रूप से भर्ती किए जाने के कारण सितंबर माह तक वेतन भुगतान के लिए आवंटित की गई राशि जून में ही पूरी तरह समाप्त हो गई।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) द्वारा गठित दो सदस्यीय जांच दल की विस्तृत पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है कि जिले की विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं में कुल 151 आउटसोर्स कर्मचारी निर्धारित संख्या से अतिरिक्त भर्ती कर लिए गए थे।

🩺 बिना प्रावधान के संजीवनी क्लीनिकों में कर दीं नियुक्तियां, पूर्व CMHO के कार्यकाल पर गहराया संदेह

जांच रिपोर्ट में यह गंभीर तथ्य भी उजागर हुआ है कि संजीवनी क्लीनिकों और अन्य शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति का कोई प्रशासनिक प्रावधान ही नहीं था। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर वहां बड़ी संख्या में कर्मचारियों की पदस्थापना कर दी गई।

स्वीकृत पदों से कहीं अधिक संख्या में भर्ती किए जाने के कारण वेतन मद पर भारी अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा, जिससे कर्मचारियों के मासिक भुगतान का बजट समय से काफी पहले ही शून्य हो गया। यह पूरा मामला पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव के कार्यकाल से जुड़ा हुआ है।

🔍 शिकायत के बाद दो सदस्यीय दल ने खोली पोल: डॉक्टर जगदीश राजपूत और डॉक्टर पवन जैन ने की जांच

आउटसोर्स कर्मचारियों की नियम विरुद्ध भर्ती किए जाने और कर्मचारियों को निर्धारित न्यूनतम दर से भी कम वेतन दिए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इसके बाद वर्तमान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए दो सदस्यीय दल का गठन किया।

इस जांच दल में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर जगदीश राजपूत और डॉक्टर पवन जैन शामिल थे। जांच दल ने अपनी पड़ताल में पाया कि प्रशासनिक स्वीकृति न होने के बावजूद कई सेंटरों पर कागजों और जमीनी स्तर पर मनमाने तरीके से कर्मचारियों की तैनाती की गई थी।

⚖️ जिम्मेदार अधिकारियों पर कसेगा कानूनी शिकंजा: जांच रिपोर्ट के आधार पर वित्तीय अनियमितता की होगी कार्रवाई

जांच का सबसे संवेदनशील और गंभीर पहलू यह सामने आया है कि जिन स्वास्थ्य केंद्रों में आउटसोर्स पदों की कोई व्यवस्था ही नहीं थी, वहां भी अवैध नियुक्तियां बांटी गईं।

अब जांच दल द्वारा सौंपी गई विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जा रहा है कि इन अतिरिक्त और अवैध नियुक्तियों के लिए मुख्य रूप से कौन जिम्मेदार है। साथ ही, सरकारी बजट और सार्वजनिक राशि के इस गंभीर दुरुपयोग के लिए संबंधित अधिकारियों व संलिप्त लोगों के खिलाफ किस स्तर पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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