मध्य प्रदेश में AI और ITMS से चलेंगी 520 नई बसें, 2027 तक 1100 बसों का बड़ा लक्ष्य

मध्य प्रदेश परिवहन विभाग अगले 6 महीने में 520 नई AI और ITMS से लैस बसें चलाएगा। ONDC टिकटिंग, सीसीटीवी और पैनिक बटन से यात्रियों को मिलेगा स्मार्ट और सुरक्षित सफर।

Sep 13, 2026 - 11:29
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मध्य प्रदेश में AI और ITMS से चलेंगी 520 नई बसें, 2027 तक 1100 बसों का बड़ा लक्ष्य

भोपाल। मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर अब पूरी तरह से बदलने वाली है। तकनीक और सहूलियत का ऐसा बेहतरीन तालमेल होने जा रहा है, जिससे यात्रियों का सफर पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित, सुगम और स्मार्ट हो जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन विभाग अगले छह महीनों के भीतर अपने बेड़े में 520 नई बसें जोड़ने जा रहा है। खास बात यह है कि इन बसों को किसी पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए संचालित किया जाएगा। इससे यात्रियों की जरूरत के हिसाब से रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी।

🎯 2027 तक 1100 बसों का विशाल लक्ष्य: 9 नए डिपो के साथ तैयार हो रहे आधुनिक मोबिलिटी हब

परिवहन विभाग ने वर्ष 2027 तक अपनी बसों की कुल संख्या को बढ़ाकर 1100 तक ले जाने का एक बड़ा खाका तैयार किया है। इसी कड़ी में पहले चरण में 486 'पीएम ई-बसें' और 34 नई इंटरसिटी बसें जल्द ही सड़कों पर शुरू की जाएंगी।

इतनी बड़ी संख्या में बसों के सुचारू रखरखाव के लिए 9 नए और आधुनिक डिपो बनाए जा रहे हैं। हर डिपो की क्षमता इतनी होगी कि वहां एक साथ 100 बसें आराम से खड़ी की जा सकेंगी। इसके अलावा, पुराने डिपो को भी नए सिरे से विकसित कर उन्हें आधुनिक 'मोबिलिटी हब' बनाने की तैयारी है, जिसमें निजी निवेश को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

🤖 यात्रियों की वास्तविक मांग और AI से तय होंगे रूट: 'यात्री परिवहन विजन समिट-2026' में बना बड़ा प्लान

हाल ही में इंदौर में आयोजित 'यात्री परिवहन विजन समिट-2026' में विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बसें खाली न दौड़ें, बल्कि वहीं चलें जहां यात्रियों को उनकी वास्तविक आवश्यकता है। इसके लिए ट्रांजिट इंटेलिजेंस और एआई का सहारा लिया जाएगा।

एआई यह तय करेगा कि किस रूट पर किस समय यात्रियों का कितना दबाव है और उसी डेटा के आधार पर बसों की संख्या व उनके फेरे (फ्रीक्वेंसी) तय किए जाएंगे। AICTSL के अधिकारियों का भी मानना है कि यात्रियों की वास्तविक मांग को समझकर रूट तय करना ही सफल संचालन की कुंजी है।

💳 एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी सारी सुविधाएं: ONDC और NCMC कार्ड से आसान होगा भुगतान

यात्रियों को अब टिकट और बस की लोकेशन के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। ओएनडीसी (ONDC) के तहत एक इंटीग्रेटेड टिकटिंग सिस्टम लाया जा रहा है। इससे यात्रियों को एक ही ऐप या प्लेटफॉर्म पर बस का रूट, उसकी उपलब्धता और किराए की पूरी जानकारी मिल जाएगी।

इसके साथ ही डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए यूपीआई (UPI), एनसीएमसी मोबिलिटी कार्ड, डेबिट/क्रेडिट कार्ड और ई-वॉलेट जैसे सभी विकल्प यात्रियों के लिए उपलब्ध रहेंगे।

🛡️ सुरक्षा और पर्यावरण दोनों का रखा जाएगा पूरा ध्यान: 70 हजार टन कम होगा कार्बन उत्सर्जन

बड़ी संख्या में ई-बसों के सफल संचालन से राज्य में हर साल लगभग 70 हजार टन कार्बन उत्सर्जन कम होने का अनुमान है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।

इसके साथ ही यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी बसों में सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन अनिवार्य किए जा रहे हैं। इन बसों को सीधे मुख्य 'कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' से जोड़ा जाएगा, जिससे ड्राइवर की हरकतों और बस की लोकेशन की पल-पल निगरानी की जा सकेगी।

💼 घाटे से उबरने के लिए अपनाए जाएंगे कमाई के नए मॉडल: डिपो में खुलेंगे रिटेल आउटलेट और लॉजिस्टिक्स हब

अक्सर देखा जाता है कि सरकारी बस सेवाएं वित्तीय घाटे का सौदा साबित होती हैं। इसे देखते हुए विशेषज्ञों ने केवल किराए पर निर्भर न रहकर कमाई के अन्य व्यावसायिक स्रोत विकसित करने की सलाह दी है।

वर्ल्ड बैंक और अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया है कि बस डिपो को केवल पार्किंग तक सीमित न रखकर, वहां रिटेल आउटलेट और लॉजिस्टिक्स जैसी व्यावसायिक गतिविधियां भी शुरू की जानी चाहिए। इससे परिवहन विभाग का घाटा कम होगा और संचालन अपने पैरों पर खड़ा हो सकेगा।

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