महाकाल मंदिर के खजाने की होगी जांच? महापौर मुकेश टटवाल ने दान में मिले सोने-चांदी के सत्यापन की मांग की
महाकाल मंदिर के कोषागार में जमा सोना-चांदी और आभूषणों के सत्यापन की मांग। महापौर मुकेश टटवाल ने कलेक्टर को पत्र लिखकर पारदर्शिता और रिकॉर्ड अपडेट करने का आग्रह किया।
उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर के कोषागार में वर्षों से जमा दान की बहुमूल्य संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर महापौर मुकेश टटवाल ने पुनः सक्रियता दिखाई है। उन्होंने मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर रौशन कुमार सिंह को पत्र लिखकर दान में प्राप्त स्वर्ण, रजत और अन्य आभूषणों के भौतिक सत्यापन एवं अद्यतन सूचीकरण की मांग की है। महापौर का मानना है कि मंदिर की अमूल्य संपत्ति का स्पष्ट रिकॉर्ड श्रद्धालुओं के विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
📋 छह सदस्यीय समिति का गठन और पुरानी प्रक्रिया
पूर्व में मंदिर प्रबंध समिति ने 17 सितंबर 2023 को दान सामग्री के सत्यापन के लिए एक छह सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति को मंदिर के कोषागार में सुरक्षित रखी गई बहुमूल्य धातुओं और आभूषणों का भौतिक परीक्षण कर विस्तृत प्रतिवेदन सौंपने का कार्य सौंपा गया था। हालांकि, चुनाव आचार संहिता लागू हो जाने के कारण यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया बीच में ही रुक गई थी।
👥 कौन है समिति में शामिल?
महापौर मुकेश टटवाल की अध्यक्षता वाली इस समिति में मंदिर प्रबंध समिति के अशासकीय सदस्य प्रदीप गुरु, राजेंद्र शर्मा और राम शर्मा के साथ मूल्यांकनकर्ता अतिन जड़िया और सहायक प्रशासनिक अधिकारी आर.के. तिवारी शामिल हैं। अब महापौर ने पुनः कलेक्टर को पत्र लिखकर इस रुकी हुई प्रक्रिया को यथाशीघ्र शुरू करने का आग्रह किया है।
⚖️ पारदर्शिता से बढ़ेगा श्रद्धालुओं का भरोसा
महापौर का कहना है कि भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ बाबा महाकाल को सोना-चांदी अर्पित करते हैं। अतः मंदिर समिति का यह नैतिक दायित्व है कि इस दान सामग्री का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाए। इस सत्यापन प्रक्रिया से मंदिर के पास उपलब्ध कुल संपत्ति का सही आकलन हो सकेगा और इसके संरक्षण एवं भविष्य में होने वाले उपयोग में भी पूर्ण पारदर्शिता बनी रहेगी।
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