एमपी के 5 मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती पर हाई कोर्ट की रोक; नियमों के उल्लंघन का मामला
मध्य प्रदेश के 5 मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक। याचिका में डीन पद को 100% पदोन्नति से भरने की मांग। जानें पूरा मामला।
जबलपुर। मध्य प्रदेश के पांच नए मेडिकल कॉलेजों (बुरहानपुर, उमरिया, दमोह सहित) में डीन के पदों पर चल रही प्रत्यक्ष भर्ती प्रक्रिया पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह भर्ती प्रक्रिया नियमों के उल्लंघन के आरोपों के चलते कठघरे में खड़ी हो गई है।
⚖️ 100 प्रतिशत पदोन्नति की मांग
रीवा के वरिष्ठ चिकित्सक एवं प्रोफेसर डॉ. मनोज इंदूलकर द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि 'मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा भर्ती नियम, 2023' के तहत डीन का पद शत-प्रतिशत 'पदोन्नति' (Promotion) के माध्यम से भरा जाना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता का दावा है कि ऐसे में सरकार द्वारा इन पदों के लिए सीधी भर्ती (Direct Recruitment) का विज्ञापन जारी करना नियमों के प्रतिकूल और कानूनी प्रक्रिया का सीधा उल्लंघन है।
📊 फैक्ट फाइल: विवाद का सारांश
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भर्ती विज्ञापन पर रोक: 18 मई 2026 को जारी विज्ञापन पर हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।
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सरकार को निर्देश: राज्य शासन को अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
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नियमों का तर्क: डीन का पद नियमों के अनुसार 100% पदोन्नति कोटे का बताया गया है।
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बड़ा असर: इस आदेश के बाद वर्ष 2024 में सीधी भर्ती के जरिए नियुक्त हुए 18 अन्य डीन की वैधानिकता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
🏥 मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर असर
यह मामला केवल पांच मेडिकल कॉलेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में प्रदेश की पूरी मेडिकल शिक्षा व्यवस्था की वरिष्ठता, पदोन्नति और भर्ती नीति की दिशा तय करेगा। यदि कोर्ट का अंतिम निर्णय याचिकाकर्ता के पक्ष में आता है, तो प्रदेश भर में चिकित्सा अधिकारियों के करियर और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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