चिंतामन गणेश मंदिर का गर्भगृह हुआ चांदी से रोशन; 35 किलो चांदी से हुआ रजत मंडित
उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर का गर्भगृह अब 35 किलो चांदी से दमक रहा है। एक भक्त ने गुप्त दान देकर मंदिर को रजत मंडित कराया। जानें मंदिर का पौराणिक इतिहास।
उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन के प्रसिद्ध चिंतामन गणेश मंदिर को अब रजत मंडित कर दिया गया है। एक श्रद्धालु द्वारा दिए गए गुप्त दान के माध्यम से मंदिर के गर्भगृह को 35 किलो से अधिक शुद्ध चांदी से सजाया गया है। चांदी की लागत और स्वर्णकारों की मेहनत को मिलाकर इस भव्य कार्य में एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च हुई है। मंदिर प्रशासक अभिषेक शर्मा के अनुसार, दानदाता ने करीब एक माह पूर्व आवेदन देकर इसकी अनुमति ली थी और स्वयं अपनी देखरेख में यह कार्य पूर्ण करवाया है।
🚩 भगवान श्रीराम से जुड़ा है मंदिर का पौराणिक महत्व
पं. शकर पुजारी ने बताया कि चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन के प्रमुख 'षड्विनायक' मंदिरों में से एक है। मान्यता है कि वनवास के दौरान जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मणजी तीर्थपुरी अवंतिका (उज्जैन) आए थे, तब उन्होंने विघ्न विनाश और मनोकामना पूर्ति के लिए यहाँ भगवान चिंतामन, इच्छामन और सिद्धि विनायक की स्थापना की थी। आज भी देशभर से लाखों भक्त अपनी चिंताओं से मुक्ति पाने के लिए यहाँ दर्शन करने आते हैं। मंदिर परिसर में एक प्राचीन 'लक्ष्मण बावड़ी' भी स्थित है।
🏰 राजा भोज के काल से जुड़ा है इतिहास
पुराविद डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार, चिंतामन गणेश मंदिर का निर्माण मालवा के भूरे बलुआ पत्थर से किया गया है, जो परमार राजा भोज के शासनकाल की वास्तुकला को दर्शाता है। इतिहास में इस मंदिर को कई बार आक्रमणों का सामना करना पड़ा, जिसके बाद मराठा काल में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर द्वारा इसका जीर्णोद्धार कराया गया। वर्तमान में मंदिर के स्तंभ और शिखर को देखकर यह स्पष्ट होता है कि पुराने अवशेषों को जोड़कर इसे पुनः निर्मित किया गया था, जो इसकी प्राचीन भव्यता को संजोए हुए है।
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