खिरिया असली स्कूल का बुरा हाल; लाखों का बजट खर्च फिर भी छत से रिसता पानी, कब जागेगा शिक्षा विभाग?

दमोह के खिरिया असली स्कूल की छत जर्जर, दीवारों से रिसता है पानी। 161 बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर। प्रशासन से मरम्मत की गुहार।

Jul 09, 2026 - 17:04
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खिरिया असली स्कूल का बुरा हाल; लाखों का बजट खर्च फिर भी छत से रिसता पानी, कब जागेगा शिक्षा विभाग?

दमोह। बटियागढ़ ब्लॉक के एकीकृत स्कूल खिरिया असली में शिक्षा का हाल बेहाल है। स्कूल की इमारत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। कक्षा पहली से आठवीं तक के 161 छात्र-छात्राएं अपनी जान जोखिम में डालकर टपकती छतों और दरार पड़ी दीवारों के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। मासूम बच्चों के ऊपर हर पल छत गिरने का खतरा मंडरा रहा है।

⛈️ पॉलिथीन के सहारे चल रहा स्कूल

स्कूल की स्थिति इतनी खराब है कि बारिश के मौसम में छत से पानी टपकता है और दीवारें भी नम होकर रिसने लगती हैं। स्कूल प्रभारी प्रधान अध्यापक राधे पटेल ने बताया कि वे 2024 से लगातार शासन और बीआरसी को जर्जर भवन के बारे में आवेदन दे रहे हैं। इंजीनियर ने निरीक्षण के बाद स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यह बिल्डिंग खतरनाक है और इसमें कक्षाएं न लगाई जाएं। लेकिन, अन्य कोई सुरक्षित स्थान उपलब्ध न होने के कारण मजबूरी में इसी जर्जर भवन में बच्चों को बैठाना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीण महेंद्र सिंह ने बताया कि मजबूरी में हर साल पॉलिथीन खरीदकर छत को ढका जाता है, जो कुछ समय बाद फट जाती है।

💰 मरम्मत के करोड़ों, पर व्यवस्था जस की तस

दमोह जिले में 289 जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए 2 किस्तों में लगभग 7 करोड़ 95 लाख रुपए की राशि आवंटित की गई है। इसके बावजूद खिरिया असली जैसे कई स्कूल आज भी बदहाल हैं। यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर यह राशि कहां खर्च की जा रही है? जमीनी स्तर पर स्कूलों की स्थिति में सुधार क्यों नहीं दिख रहा?

🏛️ प्रशासन का तर्क और भविष्य की राह

जिला शिक्षा अधिकारी सत्यम चौरसिया का कहना है, "जो भी भवन जर्जर हैं, उनमें कक्षाएं न लगाने के स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं। हमने पिछले सत्रों में स्कूलों को मरम्मत के लिए राशि प्रदान की थी, लेकिन जहां आवश्यकता अभी भी बनी हुई है और राशि नहीं मिली है, वहां के लिए हम शासन से अतिरिक्त फंड की मांग कर रहे हैं।"

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