एमपी में UCC विधेयक लाने की तैयारी; 4 भाग, 404 धाराएं और आदिवासियों को छूट
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) का फाइनल ड्राफ्ट सीएम मोहन यादव को सौंपा गया। इसमें आदिवासियों को बाहर रखने की सिफारिश है। मानसून सत्र में आ सकता है विधेयक।
भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। इसके लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को संहिता का फाइनल प्रतिवेदन सौंप दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्धारित समय-सीमा में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर समिति के अध्यक्ष और सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया। सरकार की ओर से लगातार यह संकेत दिए जा रहे हैं कि इसी आगामी विधानसभा सत्र में यूसीसी विधेयक को पटल पर रखा जा सकता है। इस प्रस्तावित संहिता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अनुसूचित जनजातियों (ST) को इसके दायरे से बाहर रखने की मजबूत अनुशंसा की गई है।
📊 तीन खंडों में बंटी है UCC रिपोर्ट: 4 भाग और 404 धाराएं शामिल
मुख्यमंत्री को सौंपे गए इस विस्तृत प्रतिवेदन को कुल तीन महत्वपूर्ण हिस्सों में विभाजित किया गया है, जो इस प्रकार हैं:
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पहला खंड (अनुशंसाएं): इसमें समिति ने अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और विभिन्न राज्यों की विधिक व्यवस्थाओं व पारंपरिक प्रथाओं का गहन विश्लेषण कर अपनी 10 अध्यायों में अनुशंसाएं रखी हैं।
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दूसरा खंड (विधेयक का प्रारूप): समिति ने मध्य प्रदेश में प्रचलित नियमों को ध्यान में रखकर विधेयक का कानूनी प्रारूप तैयार किया है, जिसमें कुल 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं।
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तीसरा खंड (जन परामर्श प्रतिवेदन): इसमें जिला, राज्य स्तर और वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त फीडबैक का विवरण है। समिति को पूरे प्रदेश से 9.58 लाख से अधिक सुझाव मिले, जिनका लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण इसमें शामिल है।
🔍 इन पारिवारिक व व्यक्तिगत विषयों पर हुआ गहन अध्ययन
राज्य सरकार द्वारा गठित इस उच्च स्तरीय समिति को नागरिकों से जुड़े विभिन्न व्यक्तिगत और पारिवारिक विषयों पर मौजूदा व्यवस्थाओं के अध्ययन की जिम्मेदारी दी गई थी। समिति ने मुख्य रूप से विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण (गोद लेना) और लिव-इन संबंधों से जुड़ी प्रचलित प्रथाओं का अध्ययन किया। इसके बाद मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के पूरी तरह अनुकूल यह व्यापक प्रारूप तैयार किया गया है।
🌦️ मानसून सत्र में विधेयक पेश होने की प्रबल संभावना
इस ड्राफ्ट को तैयार करते समय समिति ने लैंगिक समानता सुनिश्चित करने, विविध अनुष्ठानिक प्रथाओं को अप्रभावित रखने और संवैधानिक उपबंधों व लोकनीति का सम्मान करने को मूल आधार बनाया है। समिति द्वारा प्राप्त इस प्रतिवेदन को अब राज्य शासन के विधि विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है। विधेयक में आवश्यक अंतिम सुधारों और वरिष्ठ सचिव समिति की समीक्षा प्रक्रिया के बाद, इसे मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिलते ही आगामी मानसून सत्र में विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की पूरी संभावना है।
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