करोड़ों की पेनल्टी के बाद भी कैसे रिन्यू हुआ माइनिंग पट्टा? हाईकोर्ट ने डबरा अवैध खनन पर दिखाई सख्ती
ग्वालियर हाई कोर्ट ने डबरा में अवैध खनन पर कड़ा रुख अपनाते हुए 16 पट्टों पर रोक लगाई है। अदालत को गुमराह करने पर डबरा SDO को अवमानना का नोटिस जारी किया गया है।
ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने डबरा क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध खनन और प्रशासनिक अमले की घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है. न्यायालय ने डबरा क्षेत्र के सभी 16 खनन पट्टों (Mining Leases) पर संचालित हो रहीं खनन गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है. न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने डबरा के अनुविभागीय अधिकारी (SDO) रूपेश रतन सिंघई द्वारा अदालत में अधूरी और भ्रामक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को बेहद गंभीर माना है. कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ मानते हुए उनके खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं. यह पूरा आदेश याचिकाकर्ता अकबर खान द्वारा दायर की गई एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया गया.
📄 2. करोड़ों की रिकवरी के बावजूद रिन्यू हुआ पट्टा: हाईकोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
अदालत ने सरकारी रिकॉर्ड की जांच के दौरान पाया कि वर्ष 2017 में अवैध खनन के गंभीर आरोपों में जारी किए गए कारण बताओ नोटिस आज तक ठंडे बस्ते में पड़े हुए हैं. दोषियों से करोड़ों रुपये की रॉयल्टी और पेनल्टी की वसूली नहीं की गई, बल्कि इसके विपरीत कई मामलों में उन्हीं दागी खनन पट्टों का बाद में नवीनीकरण (रिन्यू) भी कर दिया गया.
न्यायालय द्वारा रेखांकित किया गया प्रमुख मामला: "पट्टाधारक बच्चन सिंह के मामले में स्वीकृत सीमा क्षेत्र से बाहर जाकर लगभग 1.40 लाख घनमीटर खनिज निकालने का गंभीर आरोप था. नियमों के तहत उनके खिलाफ 21.04 करोड़ रुपये की रॉयल्टी और 17.53 करोड़ रुपये की पेनल्टी की कार्रवाई प्रस्तावित थी. इसके बावजूद, विभागीय अधिकारियों ने सांठगांठ कर वर्ष 2020 में उनका खनन पट्टा दोबारा रिन्यू कर दिया. बिना 'नो-ड्यूज सर्टिफिकेट' (No-Dues Certificate) के यह नवीनीकरण कैसे संभव हुआ?"
हाई कोर्ट ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए इन सभी विवादित मामलों के नवीनीकरण की मूल फाइलें तलब की हैं और राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है.
👤 3. "गलत तत्वों को संरक्षण दे रहे हैं अधिकारी": हाई कोर्ट ने लगाई अधिकारियों को फटकार
सुनवाई के दौरान जब डबरा एसडीओ रूपेश रतन सिंघई से जवाब तलब किया गया, तो उन्होंने अदालत के समक्ष यह स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) दाखिल करने से पहले अधिकांश खनन क्षेत्रों का जमीनी निरीक्षण तक नहीं किया था. वे कोर्ट में यह स्पष्ट करने में भी पूरी तरह असमर्थ रहे कि उनके क्षेत्र में वर्तमान समय में माइनिंग चल रही है या नहीं.
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हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणी: अदालत ने इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर तीखी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह अधिकारियों की या तो अक्षम्य लापरवाही है या फिर यह गलत तत्वों (माफियाओं) को प्रशासनिक संरक्षण देने का सीधा प्रयास है.
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जिम्मेदारी का अहसास: कोर्ट ने याद दिलाया कि पर्यावरण संरक्षण और सरकारी राजस्व की सुरक्षा करना सरकारी अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन डबरा क्षेत्र में इस जिम्मेदारी का खुला मखौल उड़ाया गया.
📹 4. ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान व्यक्तिगत रूप से तलब: ई-चेक पोस्ट के CCTV फुटेज जब्त करने के आदेश
अदालत की नाराजगी को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेडकर ने पक्ष रखा और बताया कि ग्वालियर कलेक्टर अवैध माइनिंग को रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई कर रही हैं. इसके तत्काल बाद ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया. हाई कोर्ट ने कलेक्टर को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि वे खुद मौके पर जाकर सुनिश्चित करें कि सभी 16 खनन पट्टों पर काम पूरी तरह बंद हो और अवैध परिवहन पर पूर्ण अंकुश लगे.
🔒 5. सबूत मिटाने की कोशिश पर कोर्ट की चेतावनी: 15 दिनों में मांगा जवाब
न्यायालय ने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए क्षेत्र के सभी ई-चेक पोस्ट के डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) को तुरंत जब्त कर सीलबंद लिफाफे में सीसीटीवी फुटेज और ई-परमिट (ETP) का पूरा रिकॉर्ड अदालत में पेश करने का आदेश दिया है. अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि सीसीटीवी फुटेज में किसी भी तरह की छेड़छाड़ या रिकॉर्ड गायब होने की बात सामने आई, तो इसे साक्ष्य नष्ट करने (Tampering of Evidence) का गंभीर अपराध माना जाएगा. एसडीओ रूपेश रतन सिंघई को अवमानना मामले में जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है, जबकि इस मुख्य मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई और अवमानना प्रकरण की विशेष सुनवाई 31 जुलाई को तय की गई है.
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