पीएम ई-बस सेवा के तहत इंदौर को बड़ी सौगात, ₹8.92 करोड़ की लागत से बने नए चार्जिंग स्टेशन्स
इंदौर स्मार्ट सिटी ने देवास नाका और नायता-मुंडला में दो अत्याधुनिक ई-बस डिपो तैयार किए हैं, जहाँ 160 इलेक्ट्रिक बसों की पार्किंग और फास्ट चार्जिंग की व्यवस्था होगी।
इंदौर। शहर में सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह इलेक्ट्रिक (Eco-Friendly) बनाने की दिशा में स्मार्ट सिटी कंपनी ने एक बड़ा कदम उठाया है. इसके तहत देवास नाका आईएसबीटी (ISBT) और नायता-मुंडला आईएसबीटी में दो अत्याधुनिक ई-बस डिपो का निर्माण अंतिम चरण में है. इन दोनों डिपो को मिलाकर कुल 160 इलेक्ट्रिक बसों की सुरक्षित पार्किंग और हाई-टेक चार्जिंग की विश्वस्तरीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी. इन डिपो के पूर्ण रूप से चालू होने के बाद शहर में आने वाली नई ई-बसों के सुचारू संचालन, नियमित रखरखाव (मेंटेनेंस) और फास्ट चार्जिंग की समस्या का काफी हद तक स्थायी समाधान हो जाएगा.
प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, नायता-मुंडला डिपो को विशाल 20 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित किया गया है, जहां अकेले 120 बसों की पार्किंग और 20 ड्यूल-साइड चार्जर लगाए गए हैं. वहीं, देवास नाका डिपो 5 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में बनकर तैयार हुआ है, जहां 40 बसों की पार्किंग और 7 ड्यूल-साइड चार्जर की अत्याधुनिक सुविधा रहेगी. दोनों ही डिपो के सिविल निर्माण कार्य लगभग 80 प्रतिशत तक पूरे हो चुके हैं और बिजली आपूर्ति से जुड़े अधिकांश बुनियादी काम भी मुस्तैदी से निपटा लिए गए हैं. वर्तमान में दोनों स्थानों पर भारी क्षमता के ट्रांसफॉर्मर, आरएमयू, एलटी पैनल और अन्य आवश्यक बिजली इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार हैं, जबकि नायता-मुंडला में तो परीक्षण के तौर पर बसों की चार्जिंग भी शुरू कर दी गई है.
⏳ 2. फंड की कमी से निर्माण में हुई थोड़ी देरी: अब अक्टूबर तक सिविल कार्य पूरा करने का रखा लक्ष्य
इन दोनों ई-बस डिपो के निर्माण की शुरुआत 14 नवंबर 2025 को की गई थी और आधिकारिक अनुबंध के अनुसार इसे महज चार महीने की समयावधि में पूरा किया जाना था. हालांकि, बीच के महीनों में प्रशासनिक स्तर पर फंड जारी होने में हुई अप्रत्याशित देरी के कारण इसके निर्माण की गति कुछ समय के लिए प्रभावित हुई थी.
संचालन और मेंटेनेंस में आएगी आसानी:
अब निर्माण एजेंसी ने तेजी दिखाते हुए आगामी अक्टूबर तक सभी बचे हुए सिविल कार्यों को शत-प्रतिशत पूरा करने का नया लक्ष्य निर्धारित किया है. गौरतलब है कि एआईसीटीएसएल (AICTSL) पहले से ही इंदौर शहर में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक बसों का सफल संचालन कर रहा है. अब केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम ई-बस सेवा योजना' के तहत इंदौर को नई ई-बसों का एक और बड़ा बेड़ा मिलने वाला है. ऐसे में इन दोनों नए डिपो के शुरू होने से आने वाली नई बसों के बेड़े के लिए शहर में एक मजबूत और पर्याप्त आधारभूत ढांचा उपलब्ध हो जाएगा. इससे बसों की नाइट पार्किंग, चार्जिंग और नियमित मेंटेनेंस एक ही परिसर में सुगमता से किया जा सकेगा, जिससे परिचालन लागत में भारी कमी आएगी.
📊 3. दोनों नए ई-बस डिपो की खास बातें: क्षमता, क्षेत्रफल और कुल लागत का पूरा विवरण
इंदौर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए दोनों डिपो की तकनीकी और आर्थिक विशिष्टताओं का तुलनात्मक विवरण इस प्रकार है:
| डिपो का नाम व विवरण | नायता-मुंडला डिपो (Nayta Mundla) | देवास नाका डिपो (Dewas Naka) |
| कुल क्षेत्रफल (Area) | 20,000 वर्गमीटर | 5,000 वर्गमीटर |
| बसों की पार्किंग क्षमता | 120 ई-बसें (Electric Buses) | 40 ई-बसें (Electric Buses) |
| अत्याधुनिक ड्यूल-साइड चार्जर | 20 चार्जर (Dual-Side) | 7 चार्जर (Dual-Side) |
| परियोजना की कुल लागत | ₹5.36 करोड़ | ₹3.56 करोड़ |
| वर्तमान स्थिति (Status) | सिविल कार्य 80% पूर्ण, चार्जिंग टेस्ट शुरू | सिविल व इलेक्ट्रिकल कार्य अंतिम चरण में |
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