देवास में इलाज के दौरान डॉक्टर पर हमला; पुलिस ने दर्ज की FIR, दो आरोपी गिरफ्तार, एक महिला फरार
देवास जिला अस्पताल में भर्ती पर्ची बनवाने की बात पर मरीज के परिजनों ने डॉक्टर और स्टाफ के साथ मारपीट की। पुलिस ने केस दर्ज कर दो आरोपियों को हिरासत में लिया है।
देवास। अपनी बदहाल सुविधाओं, असुरक्षित माहौल और आए दिन होने वाले विवादों के लिए चर्चित देवास जिला अस्पताल में शुक्रवार रात एक बार फिर भारी हंगामा हो गया. अस्पताल में उपचार के लिए लाए गए एक मरीज की भर्ती पर्ची (Admission Slip) बनवाने की मामूली बात को लेकर डॉक्टरों और परिजनों के बीच कहासुनी हो गई. इसके बाद मरीज के परिजनों ने इलाज में लापरवाही का झूठा आरोप लगाते हुए ऑन-ड्यूटी डॉक्टर और वहां मौजूद मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट शुरू कर दी. इस हिंसक झड़प के कारण अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड (Emergency Ward) में काफी देर तक अफरा-तफरी और डर का माहौल बना रहा.
👮 2. कोतवाली पुलिस ने दर्ज किया केस: दो आरोपी पुलिस हिरासत में, एक महिला फरार
वार्ड में हंगामा बढ़ता देख मौके पर तैनात पुलिस के जवान और अस्पताल के निजी सुरक्षा गार्डों ने किसी तरह बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला. इसके बाद पीड़ित डॉक्टर और स्टाफ मामले की शिकायत लेकर कोतवाली थाने पहुंचे.
पुलिसिया कार्रवाई और आरोपियों के नाम:
कोतवाली थाना पुलिस के अनुसार, फरियादी डॉक्टर क्षितिज वर्मा (पुत्र आर.एल. वर्मा, निवासी रामनगर, देवास) की लिखित शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है. पुलिस ने आरोपी रूप सिंह, सुमन (दोनों निवासी चूना खदान, बालगढ़ क्षेत्र, देवास) और रोहित चौहान (निवासी इंदौर) के विरुद्ध शासकीय कार्य में बाधा डालने, गाली-गलौज करने, मारपीट करने और अन्य सुसंगत धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है. पुलिस ने मुख्य आरोपी रूप सिंह और रोहित चौहान को राउंडअप (हिरासत में) कर लिया है, जबकि घटना में शामिल महिला आरोपी सुमन अभी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है.
🛡️ 3. सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह राम भरोसे: 500 बेड के अस्पताल में सुरक्षा के नाम पर मात्र एक पुलिस जवान
यह गंभीर घटना जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है. वर्तमान में 500 बिस्तरों (बेड) की क्षमता वाले इस बड़े जिला अस्पताल की ओपीडी (OPD) रोजाना 1200 मरीजों के पार चल रही है, लेकिन इतनी भारी भीड़ को नियंत्रित करने और डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कोतवाली थाने का मात्र एक पुलिस जवान तैनात रहता है.
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कागजी सुरक्षा: हालांकि अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि उन्होंने अलग-अलग शिफ्टों में 50 से अधिक निजी सुरक्षा गार्डों को इमरजेंसी वार्ड, मैटर्निटी वार्ड और ट्रॉमा सेंटर जैसे संवेदनशील स्थानों पर तैनात कर रखा है.
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बेअसर साबित हो रहे गार्ड: जमीन हकीकत यह है कि किसी भी बड़े विवाद या हंगामे को रोकने में ये सुरक्षा गार्ड पूरी तरह बेअसर साबित होते हैं. पूर्व में भी कई बार उग्र भीड़ और असामाजिक तत्वों द्वारा इन निजी सुरक्षा गार्डों के साथ मारपीट और बदसलूकी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे अस्पताल स्टाफ में गहरा आक्रोश है.
| अस्पताल की स्थिति | आंकड़े और सुरक्षा तंत्र |
| अस्पताल की कुल क्षमता | 500 बेड (बिस्तर) |
| औसत दैनिक ओपीडी (OPD) | लगभग 1200 मरीज प्रतिदिन |
| तैनात पुलिस बल | कोतवाली थाने का मात्र 1 जवान |
| निजी सुरक्षा गार्ड (दावा) | अलग-अलग शिफ्टों में 50 से अधिक गार्ड |
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