भारत में जल्द चलेंगे प्लास्टिक के नोट! RBI ने पॉलीमर शीट के लिए वैश्विक टेंडर किया जारी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भारत में प्लास्टिक (पॉलीमर) नोट लाने की तैयारी कर रहा है। BRBNMPL ने वैश्विक टेंडर जारी कर चीन-पाकिस्तान की सामग्री पर कड़ा प्रतिबंध लगाया है।
भारत में पारंपरिक कागज के नोटों के युग को बदलकर डिजिटल क्रांति के साथ-साथ प्लास्टिक करेंसी (पॉलीमर नोट) लाने की दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है. रिजर्व बैंक की नोट छापने वाली पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी 'भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड' (BRBNMPL) ने इसके लिए दुनिया भर की दिग्गज कंपनियों से आवेदन (ग्लोबल टेंडर) आमंत्रित किए हैं. इन वैश्विक कंपनियों को ऐसे अत्याधुनिक पॉलीमर शीट (Polymer Sheets) का निर्माण करना होगा, जिनमें पहले से ही बेहद एडवांस और आधुनिक सुरक्षा फीचर्स (Security Features) इन-बिल्ट हों. यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो इन्हीं हाई-टेक शीट पर भविष्य में भारतीय मुद्रा की छपाई की जाएगी.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर लागू होती है, तो भारतीय मौद्रिक इतिहास में पहली बार कागज की जगह प्लास्टिक के नोट आम जनता के हाथों में दिखाई देंगे. हालांकि, सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए अभी केंद्रीय बैंक (RBI) ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि सबसे पहले किस मूल्यवर्ग (Denomination) के नोटों को प्लास्टिक में बदला जाएगा और इन्हें आम बाजार में कब से जारी किया जाएगा.
🛡️ 2. राष्ट्रीय सुरक्षा पर सबसे ज्यादा जोर: चीन और पाकिस्तान की सामग्री पर रहेगा पूर्ण प्रतिबंध
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस संवेदनशील वैश्विक टेंडर में देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बेहद कड़े और सख्त नियम शामिल किए हैं:
सुरक्षा और पात्रता की शर्तें:
सरकारी मंजूरी अनिवार्य: आवेदन करने वाली किसी भी विदेशी कंपनी को सबसे पहले भारत सरकार के गृह मंत्रालय से अनिवार्य सुरक्षा मंजूरी (Security Clearance) लेनी होगी.
चीन-पाक पर बैन: कंपनियों को कड़ाई से यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत के नोटों के लिए इस्तेमाल होने वाली पॉलीमर सामग्री का कोई भी हिस्सा या कच्चा माल चीन अथवा पाकिस्तान की सीमाओं से न आए.
गोपनीयता नियम: भारत के लिए विशेष रूप से तैयार की गई यह खास सुरक्षा सामग्री किसी तीसरे देश या उसकी एजेंसी को नहीं बेची जा सकेगी.
अनुभव की शर्त: केवल वही कंपनियां इस टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र होंगी, जिन्होंने पिछले लगातार कम से कम तीन वर्षों से दुनिया के किसी अन्य देश के केंद्रीय बैंक या आधिकारिक नोट मुद्रण एजेंसी को सफलतापूर्वक पॉलीमर शीट की सप्लाई की हो.
📊 3. शुरुआती चरण में होगा फील्ड ट्रायल: दो अलग-अलग मूल्यवर्ग के नोट छापे जाने की संभावना
केंद्रीय बैंक सीधे बड़े पैमाने पर नोटों को बाजार में उतारने के बजाय पहले इन पॉलीमर नोटों का कड़े सुरक्षा मानकों के बीच फील्ड ट्रायल (व्यावहारिक परीक्षण) करेगा.
प्रारंभिक और प्रयोगात्मक चरण के लिए करीब 68,000 रीम (Ream) पॉलीमर शीट की आवश्यकता बताई गई है. जानकारों के मुताबिक, इस खेप में शुरुआती तौर पर दो अलग-अलग मूल्यवर्ग के प्रायोगिक नोट छापे जा सकते हैं. यदि विभिन्न मौसमों, तापमान और दैनिक उपयोग के बीच यह फील्ड ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है, तो इसके बाद ही बड़े पैमाने पर इसकी व्यावसायिक खरीदारी और छपाई शुरू की जाएगी.
गौरतलब है कि यह टेंडर ऐसे समय में आया है, जब केंद्रीय बैंक के शीर्ष अधिकारियों और नीति निर्धारकों द्वारा मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद कहा गया था कि देश में पॉलीमर नोट लाने का प्रस्ताव लंबे समय से विचाराधीन है. वर्तमान में आरबीआई इस योजना के सभी दूरगामी फायदों और नुकसानों का बारीकी से अध्ययन कर रहा है और फिलहाल यह पूरी योजना अपने शुरुआती तकनीकी चरण में है.
💡 4. क्यों बेहतर माने जाते हैं प्लास्टिक नोट? जानिए इनके मुख्य फायदे
कागज के नोटों की तुलना में पॉलीमर (प्लास्टिक) नोटों को वैश्विक स्तर पर अधिक सुरक्षित और टिकाऊ माना जाता है. दोनों के बीच का प्रमुख अंतर नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:
| तुलनात्मक मानक | पारंपरिक कागज के नोट (Paper Notes) | आधुनिक प्लास्टिक नोट (Polymer Notes) |
| टिकाऊपन (Durability) | जल्दी फट जाते हैं, पानी और गंदगी से खराब होते हैं. | फटना लगभग नामुमकिन, पानी और गंदगी से पूरी तरह सुरक्षित. |
| जीवनकाल (Life Span) | सीमित समय (बार-बार बदलने की जरूरत होती है). | कागज की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक लंबा जीवनकाल. |
| सुरक्षा फीचर्स | नकली नोट बनाना आसान (जालसाजी का खतरा). | आधुनिक सुरक्षा धागे और फीचर्स, नकली नोट बनाना बेहद कठिन. |
| स्वच्छता (Hygiene) | बैक्टीरिया और वायरस आसानी से चिपकते हैं. | सतह चिकनी होने के कारण गंदगी और कीटाणु नहीं ठहरते. |
दुनिया के कई विकसित और प्रमुख देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन में पिछले काफी समय से पॉलीमर नोटों का बेहद सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है. अब इसी कतार में भारत भी शामिल होने की तैयारी कर रहा है जिससे देश की अर्थव्यवस्था और करेंसी मैनेजमेंट को एक नया और आधुनिक आयाम मिलेगा.
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