चिंतामन-नईखेड़ी नई रेल लाइन प्रोजेक्ट पर बढ़ा विवाद; SDM कोर्ट में रेलवे अफसरों से मांगे जवाब
उज्जैन में चिंतामन-नईखेड़ी नई रेल लाइन प्रोजेक्ट के अलाइनमेंट पर ग्रामीणों ने रिश्वतखोरी का आरोप लगाकर SDM कोर्ट में आपत्ति जताई है। SDM कृतिका भीमावद ने रेलवे अफसरों से स्पष्ट दस्तावेज मांगे हैं। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन रेलवे स्टेशन पर ट्रैफिक लोड कम करने के लिए बनाई जा रही चिंतामन-नईखेड़ी रेलवे बायपास लाइन प्रोजेक्ट में नया पेंच फंस गया है. उप-संभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) न्यायालय में ग्रामीणों की तरफ से उतरे हाईकोर्ट एडवोकेट ने बिना पूर्व सूचना किसानों की कीमती जमीनों से अलाइनमेंट निकालने और सर्वे प्रक्रिया पर कड़ी कानूनी आपत्ति दर्ज कराई है.
सुनवाई के दौरान किसानों के अधिवक्ता ने सवाल उठाया कि रेलवे प्रशासन द्वारा तैयार किए गए तीन अलाइनमेंट में से सबसे अधिक दूरी और सर्वाधिक किसानों को प्रभावित करने वाले अलाइनमेंट को क्यों फाइनल किया गया? इस पर मौके पर मौजूद रेलवे अधिकारी संतोषजनक जवाब देने से बचते नजर आए.
एसडीएम कृतिका भीमावद ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रेलवे अधिकारियों को परियोजना से जुड़े सभी स्पष्ट और प्रामाणिक दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं. मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को तय की गई है.
यदि समय रहते रेलवे और प्रशासन द्वारा स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के शुरू होने में भारी देरी हो सकती है. मंगरोला निवासी पीड़ित किसान जीतसिंह फौजी ने आरोप लगाया कि रेलवे अधिकारियों ने अलाइनमेंट बदलने के नाम पर उनसे अनुचित मांग (रिश्वत) की थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान अपनी जमीनों को बचाने के लिए इस कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई को उच्च स्तर तक लड़ेंगे.
सिंहस्थ-2028 के दौरान उज्जैन जंक्शन पर ट्रेनों का दबाव कम करने के उद्देश्य से चिंतामन से नईखेड़ी के बीच बायपास रेल लाइन का निर्माण प्रस्तावित है. जैसे ही नया अलाइनमेंट सार्वजनिक हुआ, विवाद गहरा गया.
प्रभावित ग्रामों—दाउदखेड़ी, चिंतामन, मोहनपुरा, मंगरोला और उज्जैन कस्बे के जिन 85 सर्वे नंबरों वाले किसानों की जमीनें अधिग्रहित की जा रही हैं, उन्होंने अलाइनमेंट पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. किसानों का आरोप है कि अन्य दो संभावित अलाइनमेंट से प्रभावित रसूखदार लोगों को बचाने के लिए पटरियों का रुख जानबूझकर उनके उपजाऊ खेतों की ओर मोड़ा गया है.
प्रस्तावित रेलवे बायपास प्रोजेक्ट और इससे होने वाले बदलावों का मुख्य ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विवरण / मापदंड | आधिकारिक परियोजना ब्योरा व स्थिति |
| प्रोजेक्ट की कुल लागत | ₹189.04 करोड़ |
| प्रस्तावित ट्रैक की लंबाई | 8.60 किलोमीटर |
| प्रभावित गांव | दाउदखेड़ी, चिंतामन, मोहनपुरा, मंगरोला व उज्जैन कस्बा (85 सर्वे नंबर) |
| मुख्य उद्देश्य | इंदौर से नागदा की ओर जाने वाली ट्रेनों को सीधे बायपास से निकालना |
| प्रोजेक्ट के फायदे | इंजन रिवर्सल का समय बचेगा और उज्जैन स्टेशन का ट्रैफिक 30% घटेगा |
| वर्तमान स्थिति | SDM कोर्ट में विचाराधीन (अगली सुनवाई: 28 जुलाई) |
चिंतामन-नईखेड़ी रेल लाइन को आपस में जोड़ने के लिए रेलवे 189.04 करोड़ रुपये खर्च करने जा रहा है. इसके तहत 8.60 किलोमीटर नई पटरी बिछाकर बायपास रूट तैयार किया जाएगा.
इस बायपास के बन जाने से इंदौर की ओर से आकर नागदा/रतलाम की तरफ जाने वाली ट्रेनों को उज्जैन जंक्शन लाए बिना सीधे बाहर से निकाल दिया जाएगा. इससे ट्रेनों के इंजन रिवर्सल में लगने वाले समय की बचत होगी और उज्जैन मुख्य रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही का दबाव लगभग 30% तक कम हो जाएगा.
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