मोबाइल चोरी होने के बाद यूपीआई से निकाले पैसे, शातिर ठगों ने अपनाए नए तरीके
भोपाल में साइबर ठगी के तीन मामले सामने आए हैं, जहां APK फाइल के जरिए बैंक खाता खाली करने और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर 6.5 लाख रुपये की ठगी की गई है।
साइबर अपराधी अब आम जनता को ठगने और उनके गाढ़ी कमाई को हड़पने के लिए लगातार नए-नए और शातिर तरीके अपना रहे हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सामने आए तीन अलग-अलग मामलों ने एक बार फिर इस बात को साबित कर दिया है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय ज़रा सी भी लापरवाही बहुत बड़ी आर्थिक क्षति का कारण बन सकती है।
कहीं डॉक्टर का अपॉइंटमेंट कन्फर्म कराने के बहाने एक फर्जी APK फाइल भेजकर बैंक खाते से लाखों रुपये साफ कर दिए गए, तो कहीं भीड़भाड़ में मोबाइल चोरी होने के बाद यूपीआई के जरिए खाते से पूरी रकम ट्रांसफर कर ली गई। वहीं, एक अन्य मामले में एक युवक और उसकी मां को घर बैठे पार्ट-टाइम जॉब का लालच देकर निवेश के नाम पर भारी-भरकम रकम ठग ली गई।
इन तीनों अलग-अलग मामलों में कुल मिलाकर 6 लाख 58 हजार 350 रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया गया है। फिलहाल कमला नगर, जहांगीराबाद और कोटरा सुल्तानाबाद थाना पुलिस ने ज़ीरो एफआईआर दर्ज कर इन मामलों की गहनता से जांच शुरू कर दी है।
📱 APK फाइल डाउनलोड करते ही बैंक खाते से उड़ गए लाखों रुपये
कमला नगर थाना क्षेत्र के सहयाद्री परिसर में रहने वाले 65 वर्षीय वीरेंद्र शर्मा ने बीते 16 जुलाई को अरेरा कॉलोनी के एक डॉक्टर का अपॉइंटमेंट कन्फर्म करने के लिए गूगल सर्च इंजन से मोबाइल नंबर खोजकर कॉल किया था। कॉल रिसीव करने वाले शातिर ठग ने उन्हें व्हाट्सएप पर एक APK फाइल भेजी और उसे तुरंत डाउनलोड कर उसमें जरूरी जानकारी भरने को कहा।
जैसे ही उन्होंने उस संदिग्ध फाइल को डाउनलोड कर अपना नाम व मोबाइल नंबर दर्ज किया, उनका स्मार्टफोन असामान्य तरीके से काम करने लगा। इसके बाद 21 जुलाई की शाम उनके बैंक खाते से अलग-अलग 10 ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 4 लाख 35 हजार 175 रुपये निकाल लिए गए। पुलिस विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की फर्जी APK फाइलों के जरिए साइबर ठग पीड़ित के मोबाइल का 'रिमोट एक्सेस' हासिल कर लेते हैं और बैंकिंग तथा पर्सनल डेटा तक आसानी से पहुंच जाते हैं।
📲 मोबाइल चोरी होने के बाद यूपीआई के जरिए निकाले गए 37 हजार रुपये
जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के जेल रोड के रहने वाले 66 वर्षीय अधिवक्ता अनिल भार्गव 18 जुलाई को बाजार में दवा खरीदने गए थे। दवा का भुगतान करने के दौरान अज्ञात चोरों ने उनकी शर्ट की जेब से उनका मोबाइल फोन चुरा लिया। उन्होंने इस घटना की तुरंत पुलिस को सूचना दी और अपनी सुरक्षा के लिए सिम कार्ड भी ब्लॉक करवा दिया था।
हालांकि, दो दिन बाद जब उन्होंने अपना बैंक स्टेटमेंट निकलवाकर देखा, तो उन्हें पता चला कि मोबाइल चोरी होने के तुरंत बाद शातिर ठगों ने यूपीआई (UPI) के माध्यम से 37 हजार रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लिए हैं। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि ठगों ने पहले अपनी तसल्ली के लिए एक रुपये का ट्रायल ट्रांजेक्शन किया और उसके बाद कई किस्तों में बड़ी रकम दूसरे खातों में उड़ा ली। इस मामले की पुलिस द्वारा आगे की जांच की जा रही है।
💼 पार्ट-टाइम जॉब का लालच देकर मां-बेटे से ठगे 1.86 लाख रुपये
कोटरा सुल्तानाबाद क्षेत्र के रहने वाले 25 वर्षीय आयुष सिंह रायमाझी के पास टेलीग्राम पर गूगल मैप्स की रेटिंग और रिव्यू करने के बदले अच्छे पैसे कमाने का एक लुभावना ऑफर आया था। शुरुआत में ठगों ने उन्हें कुछ छोटे-छोटे टास्क पूरे करवाए और उसके बदले में थोड़ा भुगतान भी किया, जिससे आयुष का उन पर भरोसा पूरी तरह बढ़ गया।
इसके बाद आरोपियों ने उन्हें और अधिक मुनाफे का लालच दिया और विभिन्न 'पेड टास्क' पूरे करने के नाम पर अलग-अलग किस्तों में कुल 1 लाख 86 हजार 175 रुपये जमा करवा लिए। इसके बाद न तो उन्हें कोई पैसा वापस मिला और न ही कोई अगला भुगतान किया गया। जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपियों ने तकनीकी समस्या का झूठा बहाना बनाया और फिर अपना संपर्क पूरी तरह बंद कर दिया।
⚠️ APK फाइल क्या होती है और यह इतनी खतरनाक क्यों है?
APK (Android Package Kit) दरअसल एंड्रॉयड स्मार्टफोन के लिए एक इंस्टॉलेशन फाइल होती है। साइबर अपराधी अक्सर लोगों को फंसाने के लिए व्हाट्सएप, टेलीग्राम या एसएमएस के जरिए ऐसी फर्जी APK फाइलें भेजते हैं। जैसे ही कोई यूजर इसे अपने फोन में डाउनलोड कर इंस्टॉल करता है, उसके मोबाइल का पूरा नियंत्रण इन शातिर ठगों के हाथ में चला जाता है। इसके परिणामस्वूप बैंकिंग ऐप्स, ओटीपी (OTP), पर्सनल मैसेज, कॉन्टैक्ट लिस्ट, गैलरी की तस्वीरें और अन्य तमाम संवेदनशील जानकारियां पूरी तरह खतरे में पड़ जाती हैं।
🛡️ साइबर ठगी से बचने के लिए हमेशा अपनाएं ये जरूरी सावधानियां
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गूगल सर्च पर भरोसा न करें: इंटरनेट या गूगल सर्च से निकाले गए किसी भी अनजान कस्टमर केयर नंबर पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
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आधिकारिक स्रोत चुनें: किसी डॉक्टर, अस्पताल या बैंक का हेल्पलाइन नंबर हमेशा उनकी ऑफिशियल वेबसाइट या अधिकृत क्लीनिक से ही लें।
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APK फाइल डाउनलोड न करें: व्हाट्सएप, ईमेल या एसएमएस पर आई किसी भी अज्ञात APK फाइल को भूलकर भी डाउनलोड न करें।
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स्क्रीन शेयरिंग से बचें: किसी भी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर अपने फोन में AnyDesk, TeamViewer जैसे स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स इंस्टॉल न करें और न ही अपनी निजी जानकारी साझा करें।
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तुरंत करें शिकायत: बैंक खाते में कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखते ही तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और साइबर क्राइम की राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
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