रतलाम: निवेश क्षेत्र के लिए अतिक्रमण हटाने गए प्रशासन पर पथराव, आंसू गैस के गोले छोड़े; 3 पुलिसकर्मी घायल

रतलाम के पलसोड़ी में इंडस्ट्रियल निवेश क्षेत्र का विरोध। अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस पर पथराव, पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। जानिए क्या है पूरा विवाद।

Jun 12, 2026 - 21:38
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रतलाम: निवेश क्षेत्र के लिए अतिक्रमण हटाने गए प्रशासन पर पथराव, आंसू गैस के गोले छोड़े; 3 पुलिसकर्मी घायल

रतलाम। जिले के पलसोड़ी क्षेत्र में शुक्रवार को प्रस्तावित निवेश क्षेत्र के लिए अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन और पुलिस की टीम पर ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस घटना में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। क्षेत्र में एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

 निवेश क्षेत्र और ग्रामीणों का विरोध

एमपीआईडीसी (MPIDC) द्वारा जिले के जामथुन, बिबड़ोद, जुलवानिया, पलसोड़ी, रामपुरिया और सरवनी खुर्द की करीब 1370 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर मेगा इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किया जा रहा है। यहाँ कई कंपनियों ने काम शुरू भी कर दिया है, लेकिन ग्रामीण इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि वे वर्षों से इस शासकीय भूमि पर खेती कर रहे हैं और उन्हें रोजगार नहीं, बल्कि खेती के लिए जमीन ही चाहिए।

 झड़प का घटनाक्रम

शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे प्रशासनिक अधिकारी बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचे। दोपहर 2 बजे तक चली बातचीत विफल रही, जिसके बाद पुलिस ने जुलवानिया सरपंच छोटू मईडा सहित 20 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही अचानक ग्रामीणों ने पथराव शुरू कर दिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए बल प्रयोग किया।

 सरपंच और प्रशासन का अपना-अपना पक्ष

सरपंच छोटू भाभर का आरोप है कि ग्रामीण शांतिपूर्ण तरीके से हाईकोर्ट में स्थगन के लिए आवेदन की बात कर रहे थे, लेकिन उन्हें जबरन हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा कि पथराव असामाजिक तत्वों का काम हो सकता है। वहीं, एमपीआईडीसी के राजेश राठौर ने स्पष्ट किया कि अधिग्रहित की जा रही भूमि पूरी तरह शासकीय है और प्रभावितों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

 प्रशासन की अगली रणनीति

घटना के बाद प्रशासन ने पलसोड़ी में कड़ा पहरा लगा दिया है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन ग्रामीणों का विरोध और खेती के लिए जमीन बचाने की जिद प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। प्रशासन अब आगे की कार्रवाई को लेकर सतर्क है और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है।

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