इंदौर में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, रीना बौरासी और चिंटू चौकसे के नेतृत्व में किया गया धरना प्रदर्शन
उत्तराखंड की घटना और राहुल गांधी पर दर्ज एफआईआर के विरोध में इंदौर के राजवाड़ा पर कांग्रेस नेताओं ने धरना प्रदर्शन किया। महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने मनु स्मृति का दहन भी किया।
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सोमवार दोपहर से लेकर देर रात तक कांग्रेस पार्टी पूरी तरह विरोध प्रदर्शन के मूड में नजर आई। दिन की शुरुआत में प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी के नेतृत्व में महिलाओं ने गांधी प्रतिमा के समक्ष जोरदार प्रदर्शन करते हुए 'मनु स्मृति' का सांकेतिक दहन किया। इसके बाद विरोध का सिलसिला थमा नहीं और देर रात तक कांग्रेस के तमाम बड़े नेता और पदाधिकारी शहर के ऐतिहासिक राजवाड़ा पर धरने पर बैठ गए। कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन रात 10 बजे के बाद तक जारी रहा, जिससे स्थानीय राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई।
⚖️ उत्तराखंड में राहुल गांधी पर एफआईआर और मल्लिकार्जुन खड़गे के अपमान का मामला
कांग्रेस पार्टी की ओर से यह मोर्चा मुख्य रूप से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित अपमान और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर उत्तराखंड में दर्ज की गई एफआईआर के विरोध में खोला गया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम के बाद उत्तराखंड के भाजपा नेताओं ने जिस तरह से कार्यक्रम स्थल को धोकर 'शुद्धीकरण' किया, वह उनकी स्पष्ट दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। जब इस अनुचित कृत्य के खिलाफ राहुल गांधी ने आवाज उठाई और मुद्दा उठाया, तो उनके खिलाफ उल्टा एक फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
👥 राजवाड़ा पर जुटे कई दिग्गज नेता, दलित विरोधी मानसिकता के खिलाफ खोला मोर्चा
सोमवार की रात राजवाड़ा स्थित अहिल्या माता की प्रतिमा के नीचे दिए गए इस धरने प्रदर्शन में कांग्रेस के कई प्रमुख चेहरे और पदाधिकारी शामिल हुए। इस दौरान प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया, पूर्व अध्यक्ष अर्चना जायसवाल, कांग्रेस नेता राजेश चौकसे, पार्षद राजू भदौरिया, कुणाल सोलंकी, शैलेश गर्ग, विनय बाकलीवाल, राजा चौकसे, अमन बजाज, देवेंद्रसिंह यादव, लोकेश हार्डिया सहित शहर के तमाम ब्लॉक अध्यक्ष और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस तरह की तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई बंद नहीं हुई, तो पार्टी राज्य स्तर पर और भी उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
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