1967 के बाद पहली बार जन्माष्टमी पर ऐसा अद्भुत योग, ज्योतिषाचार्य से जानें राशि अनुसार विशेष साधना
उज्जैन में 59 साल बाद जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र और पांच ग्रहों का विशेष संयोग बना है। जानिए क्या है इसका ज्योतिषीय महत्व और राशि अनुसार उपाय।
मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक संयोग के साथ मनाया जा रहा है। 59 साल बाद ऐसा खास योग बन रहा है जहाँ भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र का महासंयोग इस पर्व को अत्यंत खास बना रहा है। प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित अक्षत व्यास के अनुसार, जब जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र पड़ता है, तो इसे सामान्य अष्टमी से अलग विशेष महत्व प्राप्त होता है और धर्मशास्त्रों में इसे 'जयंती योग' की संज्ञा दी जाती है। वहीं, जाने-माने ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डब्बेवाला के अनुसार, वर्ष 1967 के बाद साल 2026 में सूर्य, चंद्र, बुध, बृहस्पति और शनि के गोचर की विशेष पुनरावृत्ति के बीच जन्माष्टमी का यह पावन पर्व मनाया जा रहा है।
🪐 1967 के बाद फिर बना पाँच ग्रहों का महासंयोग, तकनीक और प्रशासन के क्षेत्र में बदलाव के संकेत
ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डब्बेवाला ने बताया कि 1967 के बाद 2026 में पाँच ग्रहों की स्थिति का यह अद्भुत मेल बहुत कुछ कहता है। इस बार सूर्य सिंह राशि में, चंद्रमा वृषभ राशि में, बुध सिंह राशि में, बृहस्पति कर्क राशि में और शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से यह स्थिति तकनीकी संचार, प्रशासन, अध्यात्म और धर्म के क्षेत्र में बड़े बदलाव के संकेत देती है। 1967 के समय भी सामाजिक व्यवस्था में बड़े बदलाव देखे गए थे, और इस बार भी राष्ट्र के प्रभाव में वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं। इसके अलावा, जिन कन्याओं के विवाह में बाधा आ रही है, वे जन्माष्टमी से भगवान कृष्ण की पूजा के साथ माँ कात्यायनी की विशेष साधना शुरू कर सकती हैं।
✨ राशि अनुसार करें विशेष साधना और पाठ, मनोवांछित फल की होगी प्राप्ति
पंडित अमर डब्बेवाला के अनुसार, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अपनी राशि के अनुसार विशेष पाठ और मंत्र जाप करने से भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है:
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मेष राशि: ऋणमोचक मंगल स्तोत्र के साथ कृष्णाष्टकम् का पाठ करें।
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वृषभ राशि: कनकधारा स्तोत्र के साथ कृष्ण कीलकम् का पाठ करें।
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मिथुन राशि: आपदुद्धारक दुर्गा स्तोत्र के साथ कृष्ण स्तम्भन का पाठ करें।
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कर्क राशि: शिवाष्टक के साथ कृष्ण कवच का पाठ करें।
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सिंह राशि: सूर्यमण्डलाष्टकम् के साथ श्रीकृष्ण के नौ अक्षरों वाले बीज मंत्र का जाप करें।
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कन्या राशि: देवी कात्यायनी स्तोत्र के पाठ के साथ श्रीकृष्ण चरित्र के दो अध्यायों का पाठ करें।
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तुला राशि: लक्ष्मी स्तोत्र के साथ कृष्ण दीक्षा मंत्र का जाप करें।
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वृश्चिक राशि: अंगारक स्तोत्र के साथ राधाष्टकम् का पाठ करें।
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धनु राशि: सुदर्शन कवच के साथ लक्ष्मीनारायण स्तोत्र का पाठ करें।
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मकर राशि: शनि स्तवराज के साथ कृष्ण संहिता के मूल मंत्र का जाप करें।
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कुंभ राशि: शनि अष्टक के साथ श्रीकृष्ण चरित्र के चौथे अध्याय का पाठ करें।
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मीन राशि: विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र के साथ कृष्ण कथा-लीला अमृत के मूल सारतत्त्व का अध्ययन करें।
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