ग्राम रोजगार सहायकों के तबादले पर हाई कोर्ट सख्त, राज्य शासन से मांगा विस्तृत जवाब और हलफनामा
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ग्राम रोजगार सहायकों के स्थानांतरण मामले में राज्य शासन से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव को हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ग्राम रोजगार सहायकों (GRS) के स्थानांतरण से जुड़े एक अहम मामले में राज्य शासन से कड़ा जवाब तलब किया है। अदालत ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथ-पत्र (एफिडेविट) दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, कोर्ट ने शासन से ग्राम रोजगार सहायकों के तबादलों की पूरी नीति और प्रक्रिया को स्पष्ट करने को कहा है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
📜 अन्य मामले की सुनवाई के दौरान पारित हुआ आदेश, याचिकाकर्ता के वकील ने दी दलील
यह महत्वपूर्ण आदेश 'अश्विनी कुमार गुप्ता बनाम मध्य प्रदेश शासन' एवं अन्य संबंधित मामलों की संयुक्त सुनवाई के दौरान पारित किया गया है। पन्ना जिले के निवासी याचिकाकर्ता अश्विनी गुप्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता आर्यन उरमलिया ने न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा। इस दौरान शासन की स्थानांतरणीय नीति और याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए कानूनी बिंदुओं पर लंबी बहस हुई।
🛑 पद की प्रकृति और तबादला आदेश पर रोक को लेकर मुख्य विवाद, 23 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
इस पूरे मामले का मुख्य विवाद ग्राम रोजगार सहायक के पद की प्रकृति को लेकर है। जहाँ शासन की नीतियों में इस पद को स्थानांतरणीय माना गया है, वहीं याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया कि ग्राम रोजगार सहायक का पद मूल रूप से गैर स्थानांतरणीय है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से 13 जुलाई 2026 को पारित एक अन्य आदेश का हवाला भी दिया गया, जिसमें समान परिस्थितियों में तबादले पर रोक लगाई गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक विवादित तबादला आदेश के क्रियान्वयन पर रोक को बरकरार रखा है। इस मामले की आगामी सुनवाई अब 23 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
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