चुनावी राजनीति में नैतिकता को लेकर चर्चा में आए नियाज खान, पहले भी अपने बयानों से बटोर चुके हैं सुर्खियां

मध्य प्रदेश के पूर्व आईएएस अधिकारी नियाज खान ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को गंगाजल और कुरान की शपथ दिलाने का सुझाव दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

Sep 04, 2026 - 19:10
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चुनावी राजनीति में नैतिकता को लेकर चर्चा में आए नियाज खान, पहले भी अपने बयानों से बटोर चुके हैं सुर्खियां

मध्य प्रदेश कैडर के चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी नियाज खान एक बार फिर सोशल मीडिया पर की गई अपनी एक तीखी और अनोखी पोस्ट को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। इस बार उन्होंने देश की चुनावी राजनीति और राजनेताओं की निष्ठा को लेकर एक बड़ा सुझाव दिया है। खान का कहना है कि राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को टिकट देने से पहले उनके धर्म के मुताबिक विशेष शपथ दिलाई जानी चाहिए, ताकि चुनाव जीतने के बाद कोई भी जनप्रतिनिधि लालच में आकर अपना राजनीतिक दल न बदले या किसी के दबाव में बिक न जाए।

📜 गंगाजल और कुरान की शपथ के साथ वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग, दल-बदल रोकने का बताया तरीका

नियाज खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी बात रखते हुए लिखा कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से उनके धार्मिक ग्रंथों के आधार पर संकल्प लिया जाना चाहिए। उनके इस सुझाव के अनुसार, हिंदू उम्मीदवारों को गंगाजल और अपने बच्चों की कसम, जबकि मुस्लिम उम्मीदवारों को पवित्र कुरान और बच्चों की शपथ दिलाई जानी चाहिए। उनका मुख्य तर्क यह है कि यदि नेता लिखित और वीडियो रिकॉर्डेड रूप में यह संकल्प लेंगे कि जीतने के बाद वे प्रलोभन में आकर सौदा नहीं करेंगे, तो चुनावी राजनीति में भ्रष्टाचार और खरीद-फरोख्त पर रोक लग सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि शपथ का यह वीडियो पूरी तरह रिकॉर्ड किया जाना चाहिए, ताकि यदि कोई नेता अपने वादे से मुकरे या बिक जाए, तो उस वीडियो को सार्वजनिक किया जा सके।

💬 अपने बेबाक बयानों के लिए पहले भी विवादों में रह चुके हैं पूर्व आईएएस नियाज खान

बता दें कि नियाज खान अपने प्रशासनिक सेवाकाल से ही विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक टिप्पणियाँ करने के लिए जाने जाते रहे हैं। इससे पहले भी वे कई बार अपने बयानों के कारण तीखी प्रतिक्रियाओं के केंद्र में रहे हैं। फरवरी 2026 में उन्होंने सांस्कृतिक जड़ों को लेकर बयान दिया था, तो वहीं जुलाई में मॉब लिंचिंग और पहनावे को लेकर की गई उनकी पोस्ट पर काफी विवाद हुआ था। इसके अलावा, जून माह में उन्होंने देश में बढ़ती आबादी पर रोक लगाने के लिए कड़े जनसंख्या नियंत्रण और नसबंदी जैसे उपायों की वकालत की थी। उनके इन तमाम बयानों की तरह ही उनका यह ताजा सुझाव भी राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर एक नई बहस को जन्म दे चुका है।

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