मध्यप्रदेश में मानसून का रौद्र रूप, 28 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी

मध्यप्रदेश में भारी बारिश के चलते 28 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। मंदाकिनी और नर्मदा नदी उफान पर हैं, जबकि कई इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा है।

Sep 04, 2026 - 11:30
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मध्यप्रदेश में मानसून का रौद्र रूप, 28 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी

मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर से अपना आक्रामक रूप दिखाना शुरू कर दिया है। पिछले दो दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते प्रदेश के कई जिलों में नदी-नाले उफान पर आ गए हैं, और निचले इलाकों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित होने लगा है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के दौरान प्रदेश के 28 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। खासकर उन इलाकों को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है, जहाँ लगातार तेज बारिश के कारण अचानक बाढ़ आने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। चित्रकूट में प्रसिद्ध मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि मंडला क्षेत्र में भी नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। इसके अलावा छतरपुर, पन्ना और मैहर में भी बारिश का प्रकोप साफ तौर पर देखा जा रहा है।

⚠️ इन जिलों में अति भारी बारिश और अचानक बाढ़ (Flash Flood) का खतरा, बांधों से छोड़ा जा रहा पानी

मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार के लिए राजगढ़, नर्मदापुरम, गुना, शिवपुरी, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में अति भारी बारिश का रेड/ऑरेंज अलर्ट है, जबकि भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, बैतूल, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर, मंदसौर, अशोकनगर, ग्वालियर, दतिया, भिंड, श्योपुर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा और पन्ना में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पूर्वी मध्यप्रदेश के दमोह, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, नरसिंहपुर, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, सिवनी, छिंदवाड़ा, टीकमगढ़ और पश्चिमी हिस्से के अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सीहोर व बैतूल में अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए छतरपुर के कुटनी बांध और जबलपुर के बरगी बांध से पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

🌀 निम्न दबाव क्षेत्र के कारण सक्रिय हुआ मानसून, सीजन की कमी को पूरा कर रहा सितंबर का दौर

मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के मुताबिक, इस भारी बारिश के पीछे पूर्वोत्तर मध्यप्रदेश और उसके आसपास बना एक चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र मुख्य वजह है, जिसके प्रभाव से पूरे राज्य में मानसूनी गतिविधियां तेज हो गई हैं। 3 से 5 सितंबर के बीच प्रदेशभर में भारी से अति भारी बारिश का यह दौर जारी रहने की संभावना है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इस तेज बारिश के बावजूद पूरे सीजन का कुल आंकड़ा अभी सामान्य से थोड़ा पीछे है। 4 सितंबर तक प्रदेश में लगभग 29.2 इंच बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य से करीब 8 प्रतिशत कम है। जून महीने में बारिश की कमी जरूर खली थी, लेकिन जुलाई और अगस्त की अच्छी बरसात के बाद अब सितंबर की शुरुआत में सक्रिय हुए इस नए वेदर सिस्टम ने एक बार फिर बारिश का कोटा तेजी से भरना शुरू कर दिया है।

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