Indore High Court: मुहर्रम मेले पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; नगर निगम को मिली राहत नहीं, जानें पूरा विवाद

इंदौर के धोबीघाट मैदान पर मुहर्रम मेले को लेकर हाईकोर्ट का फैसला। निगम द्वारा अनुमति निरस्त करने के फैसले को कोर्ट ने पलटा। जानें क्या है पूरा विवाद और कोर्ट का तर्क।

Jun 27, 2026 - 09:44
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Indore High Court: मुहर्रम मेले पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; नगर निगम को मिली राहत नहीं, जानें पूरा विवाद

इंदौर। इंदौर के धोबीघाट स्थित नगर निगम की 6.7 एकड़ जमीन पर मुहर्रम के तीन दिवसीय मेले को लेकर चल रहा विवाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद समाप्त हो गया है। वक्फ कर्बला इंतजामिया कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम की एमआईसी (महापौर परिषद) द्वारा मेले की अनुमति निरस्त करने के फैसले को रद्द कर दिया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब मैदान पर मेला जारी रहेगा।

🎢 अनुमति मिलने और निरस्त होने का नाटकीय घटनाक्रम

मेले को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। गुरुवार को निगमायुक्त द्वारा अनुमति जारी करने के कुछ ही घंटों बाद, एमआईसी की वर्चुअल बैठक में इसे निरस्त कर दिया गया था। महापौर पुष्यमित्र भार्गव का तर्क था कि धोबीघाट की जमीन निगम के स्वामित्व की है और जिला कोर्ट के सितंबर 2024 के फैसले के अनुसार, सिर्फ 0.02 एकड़ जमीन पर ही ताजिए विसर्जन की अनुमति है। शेष जमीन पर व्यावसायिक मेले के आयोजन को उन्होंने नियमों के विरुद्ध बताया था।

🏛️ हाईकोर्ट का रुख और कमेटी का तर्क

वक्फ कर्बला इंतजामिया कमेटी ने एमआईसी के फैसले को चुनौती देते हुए शुक्रवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट ऋषि श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि निगम ने पहले अनुमति दी और फिर उसे मनमाने ढंग से वापस ले लिया। न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद एमआईसी के फैसले को गलत माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब भविष्य में मेले की अनुमति के लिए आयोजकों को आयोजन से दो महीने पहले आवेदन करना होगा और निगम को 25 दिन पहले निर्णय लेना होगा।

⚠️ एमआईसी की शर्तें और असहमति

मेले की अनुमति निरस्त करते हुए एमआईसी ने तर्क दिया था कि पिछले वर्षों में आयोजकों ने अनुमति की शर्तों का पालन नहीं किया था। साथ ही, मेले के एवज में जो राशि निगम में जमा होनी थी, वह भी जमा नहीं कराई गई थी। इन प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए निगम प्रशासन ने केवल ताजिए विसर्जन (ठंडा करने) की अनुमति रखने का निर्णय लिया था। बहरहाल, अब कानूनी हस्तक्षेप के बाद मेले के आयोजन का रास्ता साफ हो गया है।

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