चित्रकूट का आरोग्यधाम घाट बना 'हड्डी फ्रैक्चर धाम': मंदाकिनी नदी के तट पर काई से फिसलकर हर दिन घायल हो रहे श्रद्धालु
चित्रकूट के मंदाकिनी घाट पर काई के कारण रोजाना दर्जनों श्रद्धालु हो रहे घायल। एक साल में 1135 फ्रैक्चर के मामले सामने आए। पढ़ें आरोग्यधाम घाट की खतरनाक स्थिति।
चित्रकूट। धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र चित्रकूट आज एक बड़ी अव्यवस्था का सामना कर रहा है। मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित 'आरोग्यधाम घाट' इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संचालित इस घाट पर सुरक्षा और रखरखाव में भारी लापरवाही बरती जा रही है। सीमेंट और पत्थर की सीढ़ियों पर जमी मोटी काई के कारण रोजाना दर्जनों श्रद्धालु फिसलकर गिर रहे हैं, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आ रही हैं।
📊 एक साल में 1135 से अधिक लोग हुए घायल
स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक वर्ष में सिर्फ एक प्रमुख स्थानीय निजी अस्पताल में ही आरोग्यधाम घाट पर फिसलकर घायल हुए करीब 1135 लोगों का इलाज किया गया है। इनमें मामूली चोटों से लेकर गंभीर फ्रैक्चर और टांके लगाने तक के मामले शामिल हैं।
🚫 प्रबंधन और नगर परिषद की अनदेखी
स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं का आरोप है कि घाट की इस खतरनाक स्थिति को लेकर कई बार नगर परिषद चित्रकूट और आरोग्यधाम प्रबंधन को शिकायतें दी गईं, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। न तो काई हटाने के लिए नियमित सफाई की जा रही है और न ही फिसलन रोकने के लिए कोई सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। स्थानीय श्रद्धालु रामसजीवन केवट ने बताया कि पिछले महीने उनकी मां का पैर फिसलने से फ्रैक्चर हो गया था, जिसके इलाज में भारी खर्च आया।
🗣️ व्यापार और आस्था पर गहरा असर
व्यापारी संघ ने भी इस स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई है। संघ का कहना है कि आए दिन घायल श्रद्धालुओं की खबरों से चित्रकूट की छवि धूमिल हो रही है, जिसका सीधा असर पर्यटन पर पड़ रहा है। जब इस विषय पर नगर परिषद सीएमओ से पूछा गया, तो उन्होंने सारा जिम्मा दीनदयाल शोध संस्थान पर डाल दिया। वहीं, संस्थान के प्रबंधन का तर्क है कि "सीमित संसाधनों के कारण रोज सफाई संभव नहीं है।"
📢 नागरिकों की मांग: तत्काल हों सुधारात्मक कार्य
चित्रकूट के जागरूक नागरिकों और श्रद्धालुओं ने कलेक्टर सतना और कमिश्नर रीवा से मांग की है कि आरोग्यधाम घाट की तत्काल विशेष सफाई कराई जाए। साथ ही उन्होंने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
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सीढ़ियों पर फिसलन रोकने वाली (Anti-Skid) व्यवस्था या टाइल्स लगें।
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स्नान घाटों पर सुरक्षा के लिए रेलिंग की व्यवस्था हो।
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घाट पर सफाई के लिए स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।
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घायलों के त्वरित इलाज के लिए घाट पर एक प्राथमिक उपचार केंद्र (First Aid Center) खोला जाए।
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