सिखी और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम, श्योपुर में उत्साह के साथ मनाई गई जन्माष्टमी
श्योपुर के गुरुद्वारे में नामधारी संगत ने हिंदू समुदाय के साथ मिलकर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई। यह आयोजन धार्मिक सद्भाव और आपसी भाईचारे की मिसाल है।
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर हिंदू-सिख एकता और आपसी भाईचारे की एक बेहद खूबसूरत और प्रेरक तस्वीर सामने आई है। यहाँ एक स्थानीय गुरुद्वारे में नामधारी साध-संगत ने हिंदू समुदाय के साथ मिलकर श्री कृष्ण जन्मोत्सव को पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। यह पूरा आयोजन नामधारी पंथ के वर्तमान मुखी सतगुरु ठाकुर दलीप सिंह की प्रेरणा और उनके विशेष निर्देशों के तहत संपन्न किया गया, जिसने समाज में सकारात्मक संदेश दिया है।
🤝 हिंदू और सिख समाज के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्ते सदियों पुराने: जगतार सिंह जौहल
कार्यक्रम के दौरान गुरुद्वारे में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ-साथ आपसी प्रेम और सामाजिक सौहार्द का संदेश गूंजा। इस मौके पर जगतार सिंह जौहल ने कहा कि नामधारी संगत में जन्माष्टमी और रामनवमी जैसे पर्वों को श्रद्धापूर्वक मनाने की यह परंपरा हिंदू-सिख एकता को और अधिक मजबूत करने का एक अनूठा प्रयास है। उन्होंने कहा कि हिंदू और सिख समाजों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्ते रहे हैं, जिन्हें आज की युवा पीढ़ी के लिए सहेजना और मजबूत करना बेहद आवश्यक है।
🌸 श्रद्धा किसी एक समुदाय की सीमा में नहीं बंधी, धर्म के नाम पर दूरियां मिटाने का संदेश
कार्यक्रम के दौरान गुरुवाणी की पवित्र पंक्ति ''दुआपुरि सतगुर हरि क्रिसन हाहा हरि'' का स्मरण करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के आध्यात्मिक स्वरूप पर प्रकाश डाला गया। आयोजकों ने यह संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धा किसी एक समुदाय या दायरे में नहीं बंध सकती। सिखी केवल बाहरी पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, प्रेम और समर्पण इसके मूल आधार हैं। कार्यक्रम के अंत में दोनों समुदायों के लोगों ने मिलकर देश और समाज में सुख-शांति, प्रेम तथा सर्वत्र सद्भावना बने रहने की प्रार्थना की।
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