जबलपुर में नर्मदा का जलस्तर इतना कम कि दिखने लगे गंदे नाले; खतरे की जद में श्रद्धालु

जबलपुर में नर्मदा नदी का जलस्तर ऐतिहासिक रूप से कम। पैदल नदी पार करना बन रहा है जानलेवा, 15 दिन में 5 मौतें। गंदे नालों की गंदगी उजागर, प्रशासन ने दिया आश्वासन।

Jul 01, 2026 - 18:56
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जबलपुर में नर्मदा का जलस्तर इतना कम कि दिखने लगे गंदे नाले; खतरे की जद में श्रद्धालु

जबलपुर। जबलपुर में नर्मदा नदी का जलस्तर चिंताजनक रूप से गिर गया है। स्थिति इतनी विकट है कि जो घाट कभी नाव के बिना पार नहीं किए जा सकते थे, वहां अब लोग पैदल ही आवाजाही कर रहे हैं। मानसून की बेरुखी के कारण आए इस जल संकट ने न केवल आम नागरिकों की जान जोखिम में डाल दी है, बल्कि नगर निगम की पोल भी खोल दी है। पिछले 15 दिनों में नर्मदा के कुंडों और गहरी धार में फंसने के कारण 5 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

🚶 पैदल नदी पार करना बन रहा है जानलेवा खेल

ग्वारीघाट, जिलहरी घाट, तिलवारा घाट और दादा घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु अनामिका ठाकुर का कहना है कि उन्होंने पिछले 20 वर्षों में नर्मदा का इतना कम जलस्तर कभी नहीं देखा। पहले जहां मंदिर तक जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था, अब वहां लोग पैदल पहुंच रहे हैं। यह 'पैदल यात्रा' कई लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है क्योंकि नदी की धार में छिपे गहरे कुंडों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है।

🚰 नालों का राज उजागर, प्रशासन की खुली पोल

नर्मदा में पानी कम होने से शहर के गंदे नालों का सच भी सबके सामने आ गया है। जिन नालों का गंदा पानी पहले नदी के बहाव में छिप जाता था, वे अब स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। ग्वारीघाट के हिस्सों में कीचड़, मलबा और गंदगी जमा हो गई है, जिससे बदबू फैल रही है। यह स्थिति न केवल धार्मिक आस्था को चोट पहुँचा रही है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है।

🛡️ प्रशासन का पक्ष: 'घबराने की जरूरत नहीं'

जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि स्थिति को लेकर बहुत तनाव में आने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि बरगी बांध में पर्याप्त जल भंडारण है और अगले 80 दिनों तक नदी की धार में पानी छोड़ा जा सकता है। प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही मानसून सक्रिय होगा और जलस्तर सामान्य हो जाएगा।

🌍 जीवन रेखा पर मंडराता खतरा

नर्मदा नदी केवल जबलपुर ही नहीं, बल्कि नरसिंहपुर, होशंगाबाद और भोपाल जैसे कई बड़े शहरों की जीवन रेखा है। यदि यह जल संकट बरकरार रहता है, तो इन शहरों में जल आपूर्ति प्रभावित होने की प्रबल आशंका बनी हुई है। प्रशासन को जल संरक्षण और नदी की स्वच्छता पर तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।

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