महाकौशल के विकास पर आमने-सामने कांग्रेस और बीजेपी; जबलपुर में बगावत के संकेत?
इंदौर के बाद जबलपुर की उपेक्षा का मुद्दा गर्माया। विवेक तन्खा ने उठाए सवाल, तो मंत्री राकेश सिंह ने किया पलटवार। महाकौशल के विकास पर छिड़ी सियासी बहस।
जबलपुर। मध्य प्रदेश में इंदौर की उपेक्षा को लेकर उठाए गए सवालों के बाद अब राजनीति जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र की ओर मुड़ गई है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने इस मुद्दे को जबलपुर से जोड़ते हुए महाकौशल में 'बगावत' तक की बात कह दी है। वहीं, राज्य सरकार के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए विकास कार्यों का हवाला दिया है।
🎤 तन्खा के आरोप: बदहाल है महाकौशल का गौरव
विवेक तन्खा ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर जबलपुर की बदहाल स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या पिछले 30-40 वर्षों में जबलपुर में कोई नया उद्योग आया है? तन्खा ने मेडिकल यूनिवर्सिटी का विभाजन, डिफेंस फैक्ट्रियों की स्थिति, क्रिकेट स्टेडियम और डिफेंस क्लस्टर जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जबलपुर की 3 लाख महिलाओं के वस्त्र कारोबार के लिए भी कोई ठोस योजना नहीं है, जबकि भोपाल और इंदौर को मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाने में प्राथमिकता दी जा रही है।
⚡ राकेश सिंह का पलटवार: विकास का दूसरा नाम बीजेपी
सांसद तन्खा के आरोपों का जवाब देते हुए मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस को महाकौशल के विकास पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि उनके लंबे कार्यकाल में जबलपुर विकास से कोसों दूर था। उन्होंने कहा, ''भाजपा सरकार ने ही जबलपुर को संवारा है। केवल मोहन यादव के कार्यकाल में लोक निर्माण विभाग से जबलपुर को 3,500 करोड़ रुपये की सौगातें मिली हैं।'' उन्होंने कांग्रेस को अपने भीतर झांकने की सलाह दी।
⚖️ विकास बनाम राजनीति
तन्खा ने जिस तरह से जबलपुर की उपेक्षा का मुद्दा उठाया है, वह आने वाले समय में प्रदेश की सियासत में बड़ी हलचल पैदा कर सकता है। जहाँ कांग्रेस इसे जबलपुर के साथ सौतेला व्यवहार बता रही है, वहीं सत्ता पक्ष इसे चुनावी एजेंडा करार दे रहा है। जबलपुर महाकौशल का केंद्र है और यहाँ की बुनियादी सुविधाओं व औद्योगिक विकास की मांग अब प्रदेश के बड़े सियासी विमर्श का हिस्सा बन चुकी है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)