नलखेड़ा बगलामुखी मंदिर में प्राइवेट संस्था का अवैध कब्जा; बिना अनुमति ले रहे थे नकद और सोना, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
आगर-मालवा के बगलामुखी मंदिर में करोड़ों के दान और गहनों के गबन का खुलासा। बिना अनुमति रसीद काटकर चंदा ले रही थी प्राइवेट संस्था। कलेक्टर ने की जांच समिति गठित।
आगर-मालवा। प्रसिद्ध बगलामुखी शक्तिपीठ नलखेड़ा में दान और चढ़ावे के गबन का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक निजी संस्था द्वारा बिना किसी आधिकारिक अनुमति के मंदिर परिसर के भीतर समानांतर दान व्यवस्था चलाई जा रही थी। इस संस्था ने न केवल अपनी रसीदें छपवाईं, बल्कि निजी बैंक खातों में भक्तों से करोड़ों रुपये का नकद और सोने-चांदी के गहने भी जमा करवाए। कलेक्टर प्रीति यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है।
🕵️♂️ ऐसे चल रहा था 'दान चोरी' का खेल
जांच में सामने आया है कि वर्ष 2024 से सक्रिय यह संस्था पूरी तरह अनधिकृत थी। मंदिर की आधिकारिक व्यवस्था जिला प्रशासन के अधीन है, जिसके प्रमुख नलखेड़ा एसडीएम होते हैं। इसके बावजूद, उक्त संस्था ने मंदिर के नाम पर निजी बैंक खाता और मोबाइल नंबर वाली रसीदें जारी कर भक्तों को गुमराह किया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दो साल से चल रहे इस खेल की भनक न तो मंदिर प्रबंध समिति को लगी और न ही किसी अन्य प्रशासनिक अधिकारी को। अब इस बात का अनुमान लगाना मुश्किल है कि संस्था ने कुल कितनी राशि और कितना सोना-चांदी हड़पा है।
📋 जांच के दायरे में कौन? समिति को 7 दिन का समय
कलेक्टर प्रीति यादव ने इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई है, जिसमें जिला पंचायत सीईओ बीएस सोलंकी (प्रमुख), जिला कोषागार अधिकारी मनीष सोलंकी और नलखेड़ा सीएमओ मिनी अग्रवाल को शामिल किया गया है। समिति को निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच करनी है:
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मंदिर परिसर में अनधिकृत रूप से दान संग्रह की प्रक्रिया।
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निजी बैंक खातों और रसीद बुकों का सत्यापन।
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अब तक एकत्र किए गए नकद और सोने-चांदी के गहनों का हिसाब। समिति को 7 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपनी होगी।
🚩 आस्था का केंद्र है नलखेड़ा मंदिर
नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। राजनेताओं और बड़ी हस्तियों की यहां विशेष श्रद्धा है, जो अक्सर अपनी सफलता के लिए यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं। इसके अलावा, यह मंदिर तंत्र साधना का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस तरह के घोटाले ने मंदिर की व्यवस्था और सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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