इंदौर के पुराने और बाहरी क्षेत्रों में 5000 वर्गफीट तक के प्लॉट पर अब सीधे मंजूर होंगे नक्शे
इंदौर में नगर निगम को 5000 वर्गफीट तक के भूखंडों पर नक्शा पास करने का अधिकार मिल गया है। टीएंडसीपी की अनिवार्यता खत्म होने से हजारों लोगों को राहत मिलेगी।
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में वर्षों से भवन निर्माण और पुनर्निर्माण की अनुमति के इंतजार में परेशान हो रहे हजारों रहवासियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। अब नगर निगम इंदौर द्वारा छावनी, परदेशीपुरा, कुलकर्णी नगर और अन्य पूर्व विकसित बाहरी क्षेत्रों में 5000 वर्गफीट तक के भूखंडों पर भवन निर्माण के नक्शे सीधे मंजूर किए जा सकेंगे। इस प्रक्रिया के लिए अब नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) विभाग से अलग से अनुमति लेने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। वर्ष 2023 से पहले इन इलाकों में डेटा फॉर्म के माध्यम से नक्शे पास किए जाते थे, लेकिन यह व्यवस्था बंद होने के कारण लोग पिछले तीन साल से परेशान हो रहे थे।
📜 मप्र भूमि विकास नियमों में संशोधन: पुरानी कॉलोनियों, बस्तियों और मास्टर प्लान प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को मिलेगा फायदा
नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा मध्य प्रदेश भूमि विकास नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाने के बाद नगर निगम को यह अधिकार प्रदान किए गए हैं। यह नई व्यवस्था इंदौर के साथ-साथ प्रदेश के अन्य शहरों के पुराने और पूर्व विकसित क्षेत्रों में भी लागू होगी। कुम्हारखाड़ी, गाड़राखेड़ी, बाणगंगा, भागीरथपुरा, परदेशीपुरा, रेसकोर्स रोड, साऊथ तुकोगंज, एमजी रोड, हाथीपाला, चितावद और सिंधी कॉलोनी सहित दर्जनों क्षेत्रों के नागरिकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। पुराने गांवों, बस्तियों और टोलों में टीएंडसीपी के पास नक्शे या लेआउट उपलब्ध न होने के कारण जो दिक्कतें आ रही थीं, वे अब दूर हो जाएंगी।
🛣️ सड़क चौड़ीकरण में प्रभावित हुए मकानों के पुनर्निर्माण का रास्ता साफ, बिना अनुमति निर्माण की मजबूरी होगी खत्म
शहर के कई हिस्सों में मास्टर प्लान की सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण के चलते बड़े पैमाने पर मकान तोड़े गए थे। नियमों की पेचीदगियों के कारण इन टूटे हुए मकानों के पुनर्निर्माण के लिए नक्शे पास नहीं हो पा रहे थे, जिसके चलते कई लोग मजबूरी में बिना अनुमति के ही निर्माण कार्य करने को विवश थे। अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रभावित लोग नियमानुसार अपने भवनों का नक्शा स्वीकृत करवाकर वैध तरीके से निर्माण कार्य कर सकेंगे, जिससे अवैध निर्माणों और प्रशासनिक कार्रवाई के झंझट से भी मुक्ति मिलेगी।
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