धार में बदहाल शिक्षा व्यवस्था, भिलट मंदिर में पढ़ने को मजबूर 22 मासूम, शौचालय बनी कक्षा
धार जिले के कुक्षी निसरपुर ब्लॉक के ग्राम चिपराटा में प्राथमिक शाला का नया भवन न बनने से 22 बच्चे मंदिर में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर: मंदिर में पढ़ने को मजबूर 22 बच्चे, बारिश में बालिका शौचालय बना कक्षा
जर्जर स्कूल भवन टूटने के बाद भी नए भवन का इंतजार, एक साल से अधूरा पड़ा अतिरिक्त कक्ष
कुक्षी। धार जिले की कुक्षी तहसील के निसरपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम चिपराटा के टाणा से सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। यहां प्राथमिक शाला के करीब 22 बच्चे स्कूल भवन के अभाव में 8×8 फीट के छोटे से भिलट मंदिर में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, टाणा में पिछले करीब दो वर्षों से स्कूल के लिए उचित भवन उपलब्ध नहीं है। पुराना स्कूल भवन जर्जर होने के बाद उसे तोड़ने के आदेश तो हुए, लेकिन नया भवन अब तक बच्चों को नसीब नहीं हो सका।

बारिश में और बिगड़े हालात
बारिश के दौरान बच्चों की परेशानी और बढ़ गई। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण करीब छह माह पहले बने बालिका शौचालय में भी बच्चों को बैठाने की नौबत आ गई।

वहीं, पास में मौजूद आंगनवाड़ी भवन से भी बारिश के दौरान पानी टपकने की बात सामने आई है। इसके अलावा पुरानी ग्राम पंचायत का भवन भी जर्जर हालत में है, जिससे हादसे की आशंका बनी हुई है।
एक साल से अधूरा पड़ा अतिरिक्त कक्ष
ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले वर्ष स्कूल के लिए अतिरिक्त कक्ष की स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ था। लेकिन एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद निर्माण पूरा नहीं हो सका। ग्रामीणों का कहना है कि 15 अगस्त के बाद एक बार फिर निर्माण कार्य शुरू किया गया है, लेकिन फिलहाल बच्चों को मंदिर में ही पढ़ना पड़ रहा है।

मीडिया टीम जब मौके पर पहुंची, तब करीब 22 बच्चे भिलट मंदिर में बैठकर पढ़ाई करते नजर आए। छोटे से स्थान में बच्चों की कक्षाएं संचालित होने से पढ़ाई प्रभावित होने के साथ ही बारिश और गर्मी में बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

निजी स्कूल का खर्च उठाना मुश्किल
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और वे अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने का खर्च वहन नहीं कर सकते। ऐसे में सरकारी प्राथमिक शाला ही बच्चों की शिक्षा का मुख्य सहारा है। बावजूद इसके स्कूल के लिए स्थायी भवन नहीं होना शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

बताया गया कि तत्कालिक व्यवस्था के तौर पर एक ग्रामीण के कमरे में स्कूल संचालित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव से बाहर और गर्मी के मौसम को देखते हुए यह व्यवस्था बच्चों के लिए उचित नहीं है।
अधिकारियों से ग्रामीणों ने किए सवाल
मौके पर ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई और बीआरसी विजय शुक्ला से भी सवाल-जवाब किए। वहीं, बीईओ हीरालाल निगवाल भी मौके पर मौजूद रहे।

अब सवाल यह है कि जब सरकार सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं देने के दावे करती है, तो टाणा के 22 बच्चों को अपना स्कूल भवन कब मिलेगा?
क्या जिम्मेदार अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर अधूरे अतिरिक्त कक्ष का निर्माण जल्द पूरा करवाएंगे और बच्चों के लिए सुरक्षित एवं स्थायी स्कूल भवन उपलब्ध कराएंगे?
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