बुरहानपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली: जर्जर हो चुकी 108 एंबुलेंस, बीच रास्ते में फेल हुआ स्टीयरिंग; टला बड़ा हादसा
बुरहानपुर के धुलकोट में 108 एंबुलेंस की हालत खस्ता। स्टीयरिंग फेल होने से टला बड़ा हादसा। मेंटेनेंस के अभाव में आदिवासी मरीजों की जान जोखिम में।
बुरहानपुर। जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर आदिवासी बाहुल्य धुलकोट क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई है। यहाँ ग्रामीणों को जीवन रक्षक सेवाएं देने के लिए शुरू की गई 108 एंबुलेंस खुद बदहाली का शिकार हो चुकी हैं। स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा यह है कि मरीजों को अस्पताल पहुँचाने वाली ये एंबुलेंस अब बीच रास्ते में दम तोड़ रही हैं।
⚙️ स्टीयरिंग फेल होने से बाल-बाल बची जान
हाल ही में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धुलकोट से एक प्रसूता को लेने जा रही एंबुलेंस का अचानक स्टीयरिंग फेल हो गया। एंबुलेंस चालक राजेश ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए बेकाबू वाहन को सड़क किनारे नियंत्रित कर लिया, जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया। चालक राजेश का स्पष्ट आरोप है कि एंबुलेंस का नियमित मेंटेनेंस नहीं किया जाता है और बार-बार शिकायत के बावजूद बदहाल वाहनों की मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
👥 दो दर्जन गांवों का जिम्मा, पर गाड़ियां महज दो
धुलकोट स्वास्थ्य केंद्र से संचालित होने वाली ये दो एंबुलेंस दो दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों के दर्जनों गांवों के लिए एकमात्र सहारा हैं। खस्ताहाल स्थिति के कारण कई बार मरीजों को समय पर एंबुलेंस का लाभ नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें मजबूरन निजी वाहनों या मोटरसाइकिल का सहारा लेना पड़ता है। इस असुविधा के कारण गरीब आदिवासी मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और समय पर उपचार न मिलने से उनकी जान जोखिम में रहती है।
🗣️ ग्रामीणों की जिम्मेदारों से तीखी मांग
क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि जिन वाहनों पर गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों की जान बचाने की जिम्मेदारी है, वही जर्जर स्थिति में सड़क पर दौड़ रही हैं। उन्होंने जिम्मेदारों से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से इन एंबुलेंस का रखरखाव सुनिश्चित किया जाए या नई एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए, ताकि आदिवासी अंचल के लोगों को आपातकालीन सेवाएं सुचारू रूप से मिल सकें।
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