उज्जैन शिप्रा नदी होगी शुद्ध: 919 करोड़ की कान्ह डायवर्शन परियोजना का 70% काम पूरा, सिंहस्थ 2028 से पहले मिलेगी राहत
उज्जैन की शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए 919 करोड़ की कान्ह डायवर्शन परियोजना जारी। 2028 सिंहस्थ से पहले शिप्रा होगी निर्मल।
उज्जैन। भक्तों की आस्था के केंद्र उज्जैन में मोक्षदायिनी शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एक बड़ी पहल की जा रही है। वर्षों से कान्ह नदी का गंदा पानी मिलने के कारण शिप्रा नदी दूषित हो रही थी, जिससे श्रद्धालु बेहद दुखी थे। अब जल्द ही कान्ह नदी के पानी को शिप्रा में मिलने से रोक दिया जाएगा। इसके लिए 919 करोड़ रुपये की 'कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना' पर तेजी से काम चल रहा है, जिसका लक्ष्य 2028 के सिंहस्थ से पहले इसे पूरा करना है।
🏗️ 100 मीटर नीचे सुरंग और पाइपलाइन का निर्माण
इस महत्वकांक्षी परियोजना का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। कान्ह नदी के पानी को डायवर्ट करने के लिए जमीन से 100 मीटर नीचे एक विशाल सुरंग (Tunnel) बनाई जा रही है। हैदराबाद के विशेषज्ञों की देखरेख में चल रहे इस काम में 5 मीटर से अधिक व्यास की टनल और 18.5 मीटर लंबी डी-आकार (D-shape) की सीमेंट पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जो कान्ह नदी के पानी को सीधे गंभीर डैम की ओर ले जाएगी।
💧 सिंगवाड़ा तक पहुंचेगा कान्ह का पानी
योजना के अनुसार, त्रिवेणी घाट के पास जमालपुरा में एक स्टापडैम बनाया गया है, जहाँ से कान्ह नदी के पानी को रोककर पाइपलाइन के माध्यम से 30.15 किलोमीटर दूर गंभीर नदी के सिंगवाड़ा स्थित डैम में छोड़ा जाएगा। कान्ह के शुरुआती और अंतिम छोर पर 140-140 मीटर लंबे ओपन चैनल भी बनाए जा रहे हैं, ताकि पानी का बहाव निर्बाध बना रहे।
✨ सिंहस्थ 2028 के लिए बड़ी सौगात
जानकारों के अनुसार, यह परियोजना भविष्य की आबादी को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इस डायवर्शन के बाद कान्ह नदी का दूषित जल असलोदा, तुम्बावड़ा, सुर्जखेड़ी और गुधा होते हुए शिप्रा की मुख्य धारा से अलग होकर बरखेड़ा मदन गांव के पास से गुजरेगा। इस कार्य के पूर्ण होने से सिंहस्थ 2028 में आने वाले लाखों श्रद्धालु शिप्रा के शुद्ध और निर्मल जल में स्नान कर सकेंगे, जो उज्जैन के धार्मिक गौरव के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
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