बालाघाट में दिल दहलाने वाली वारदात: प्रेमी ने पिता और भाई के साथ मिलकर की प्रेमिका की निर्मम हत्या
बालाघाट के बैहर में 35 वर्षीय विधवा की गला रेतकर हत्या। प्रेमी ने पिता और भाई के साथ मिलकर रची साजिश। चार बेटियां अनाथ, आरोपी गिरफ्तार।
बालाघाट। जिले की बैहर तहसील से एक अत्यंत दुखद और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ 35 वर्षीय एक विधवा महिला, सविता धुर्वे की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस अंधे हत्याकांड का खुलासा करते हुए मृतका के प्रेमी और उसके परिजनों को गिरफ्तार कर लिया है। सविता की हत्या के बाद उसकी चार मासूम बेटियां अब पूरी तरह अनाथ हो गई हैं, जिनके सिर से पहले ही पिता का साया उठ चुका था।
👩👧👧 चार बेटियों की परवरिश का संघर्ष
सविता के पति का निधन पहले ही हो चुका था। आर्थिक तंगी से जूझ रही सविता अपनी चार बेटियों की परवरिश और भरण-पोषण के लिए संघर्ष कर रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात कृष्णा उर्फ गणेश शिवालिया से हुई। पिछले 4 वर्षों से दोनों के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था। सविता को उम्मीद थी कि यह रिश्ता उसके और उसकी बेटियों के भविष्य को सहारा देगा, लेकिन उसका भरोसा ही उसकी मौत का कारण बन गया।
🔪 शादी का दबाव बना मौत की वजह
एसडीओपी अरविंद शाह ने बताया कि 12 जून को मोदी नगर स्थित एक निर्माणाधीन मकान में सविता का रक्तरंजित शव मिला था। जांच में सामने आया कि सविता लगातार कृष्णा पर शादी करने और उसकी चारों बेटियों की जिम्मेदारी उठाने का दबाव बना रही थी। इसी कारण कृष्णा का कहीं और तय हुआ रिश्ता भी टूट गया था। विवाद बढ़ने पर आरोपी ने सविता को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची।
⚖️ पिता और भाई ने भी दिया साथ
पुलिस की पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस हत्याकांड में कृष्णा अकेला नहीं था। उसने अपने पिता बुधराम शिवालिया और भाई बलराम शिवालिया के साथ मिलकर पूरी योजना बनाई थी। वारदात को अंजाम देने के बाद सबूत मिटाने के लिए उन्होंने खून से सने कपड़े भी जला दिए थे। हालांकि, पुलिस की वैज्ञानिक जांच और तकनीकी साक्ष्यों (FSL और डॉग स्क्वॉड की मदद) ने उनकी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।
⛓️ आरोपी सलाखों के पीछे
पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त धारदार कटर, मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्य बरामद कर लिए हैं। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। एक मां के सपनों का ऐसा अंत समाज को स्तब्ध कर गया है। सविता की उन चार बेटियों के लिए अब न्याय ही एकमात्र सहारा बचा है, जिन्होंने अपनी मां को खो दिया है।
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