High Court Notice on E-Rickshaw: ई-रिक्शा के नियम होंगे सख्त? जबलपुर हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब
जबलपुर में ई-रिक्शा की बढ़ती तादाद और यातायात समस्याओं के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका। नियमों में ढील खत्म करने और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने की मांग।
जबलपुर। ई-रिक्शा अब कई शहरों में सुविधा के बजाय बड़ी यातायात समस्या बनते जा रहे हैं। जबलपुर में भी ई-रिक्शा की अनियंत्रित तादाद के कारण सड़कों पर जाम लगना आम बात हो गई है। इसके साथ ही, ड्राइवरों के नौसिखिए या नाबालिग होने की खबरें सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय बनी हुई हैं। ई-रिक्शा के निर्माण में भी मोटर व्हीकल एक्ट के मानकों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं।
⚖️ हाई कोर्ट में रिट याचिका: नियमों में शिथिलता खत्म करने की मांग
इस अव्यवस्था को देखते हुए, जबलपुर के 'नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच' के डॉ. पी.जी. नाच पांडे और रजत भार्गव ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि केंद्र सरकार द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66 में संशोधन कर ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन में जो छूट दी गई है, उसी कारण सड़कों पर इनकी संख्या जरूरत से ज्यादा हो गई है। याचिका में मांग की गई है कि इस शिथिलता को तत्काल वापस लिया जाए।
🚧 नाबालिग ड्राइवर और नियमों की अनदेखी
याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि ई-रिक्शा चालकों पर किसी भी नियम के पालन का दबाव नहीं है और प्रशासन द्वारा भी इनकी कोई जांच नहीं की जाती। इसी का नतीजा है कि शहर में नाबालिग बच्चे ई-रिक्शा चला रहे हैं, जो आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। साथ ही, ई-रिक्शा की बनावट भी मोटर व्हीकल एक्ट के सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है।
🏛️ प्रशासन और सरकार को नोटिस जारी
याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने जबलपुर जिला प्रशासन, मध्य प्रदेश राज्य सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार ई-रिक्शा के लिए नियमों को पुनः सख्त बनाएगी और सड़कों पर बढ़ती इस भीड़ को कैसे नियंत्रित किया जाएगा।
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