नवीन आपराधिक कानून में पीड़ितों के अधिकारों को लेकर बैतूल पुलिस ने चलाया जनजागरूकता अभियान

एसपी निश्चल एन. झारिया के निर्देश पर थानों में हुए जागरूकता कार्यक्रम

Jun 20, 2025 - 21:43
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नवीन आपराधिक कानून में पीड़ितों के अधिकारों को लेकर बैतूल पुलिस ने चलाया जनजागरूकता अभियान

लोकतंत्र न्यूज़, बैतूल:- जिले में नवीन आपराधिक कानून 2023 में शामिल पीड़ित-केंद्रित कानूनी प्रावधानों को लेकर आम नागरिकों को जागरूक करने के लिए एक विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया गया। यह अभियान पुलिस अधीक्षक निश्चल एन. झारिया की पहल पर 20 जून 2025 को जिले के सभी थाना क्षेत्रों में आयोजित किया गया।

इस अभियान के तहत थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के सार्वजनिक स्थलों, कॉलेजों व प्रमुख बाजारों में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित करें ताकि आमजन विशेषकर अपराध के पीड़ितों को उनके अधिकारों की जानकारी दी जा सके।

जनसंवाद कार्यक्रमों की झलकियां:

जयवंती हक्सर महाविद्यालय बैतूल में उप पुलिस अधीक्षक अजाक श्रीमती शिखा भलावी, निरीक्षक विजय सिंह ठाकुर और पुलिस टीम ने छात्रों को कानून की जानकारी दी।

पीपल चौक हमलापुर, नागपुर नाका मुलताई, खेड़ली बाजार, भौरा बस स्टैंड, मलाजपुर, बरजोरपुर, गुनखेड़, रंभा बाजार, गुदगांव चौपाटी, सलैया, बादलपुर, जाबरा, रानीपुर, छोरी, दामजीपुरा आदि स्थानों पर भी संवाद कार्यक्रम हुए।

कार्यक्रमों में एसडीओपी, थाना प्रभारी व स्टाफ की सक्रिय भागीदारी रही।

नए कानून में पीड़ितों के लिए प्रमुख अधिकार:

1. ई-एफआईआर (धारा 173(1)): पीड़ित अब ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करा सकता है।

2. जीरो एफआईआर (धारा 173): घटना कहीं की भी हो, किसी भी थाने में रिपोर्ट दर्ज संभव।

3. नि:शुल्क एफआईआर की प्रति (धारा 173(2))

4. महिला अधिकारी द्वारा यौन अपराध की रिपोर्ट (धारा 173(11)(क))

5. संवेदनशील वर्गों को स्थान छूट (धारा 179(1))

6. महिला मजिस्ट्रेट द्वारा बयान (धारा 183(6))

7. 24 घंटे में चिकित्सा परीक्षण (धारा 184)

8. 2 माह में जांच पूरी करने का प्रावधान (धारा 193(2))

9. 90 दिन में जांच प्रगति की सूचना (धारा 193(3))

10. निजी वकील रखने का अधिकार (धारा 338(2))

11. मामला वापस लेने से पहले पीड़ित की सुनवाई (धारा 360)

12. मुआवजा व पुनर्वास योजना (धारा 396)

13. बरी होने पर अपील का अधिकार (धारा 413)

उद्देश्य:

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है कि हर नागरिक विशेषकर पीड़ित व्यक्ति अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो, आत्मविश्वास के साथ न्याय प्रक्रिया का हिस्सा बने और विधिक सहायता तक उसकी पहुँच सुनिश्चित की जा सके।

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