मध्य प्रदेश में गुमशुदगी पर अब अनिवार्य होगी एफआईआर; सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बदला पुलिस का नियम

मध्य प्रदेश में वयस्कों की गुमशुदगी पर अब अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस मुख्यालय ने जारी किए निर्देश। पढ़ें पूरी जानकारी।

Jul 12, 2026 - 18:15
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मध्य प्रदेश में गुमशुदगी पर अब अनिवार्य होगी एफआईआर; सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बदला पुलिस का नियम

भोपाल। मध्य प्रदेश में लापता हुए 1.26 लाख से अधिक लोगों के परिजनों के लिए राहत भरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद अब मध्य प्रदेश पुलिस ने वयस्कों की गुमशुदगी के मामलों में नई व्यवस्था लागू की है। अब तक पुलिस अधिकांश मामलों में केवल शिकायती आवेदन लेकर खानापूर्ति करती थी, लेकिन अब गुमशुदगी की शिकायत मिलते ही पुलिस को अनिवार्य रूप से एफआईआर (FIR) दर्ज करनी होगी।

⚖️ क्या है नया नियम और प्रक्रिया?

सुप्रीम कोर्ट ने 'जी गणेश बनाम तमिलनाडु राज्य' मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया है कि गुमशुदगी के हर मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इसी निर्देश के तहत, अब पीड़ित परिजन जब शिकायत लेकर पहुंचेंगे, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140 (3) के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। स्पेशल डीजी (महिला अपराध) अनिल कुमार के अनुसार, शुरुआती एफआईआर के बाद पुलिस जांच करेगी। यदि जांच के दौरान अपहरण, मानव दुर्व्यापार (Human Trafficking) या अन्य किसी गंभीर अपराध के तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित धाराओं को भी जोड़ा जाएगा।

📊 चौंकाने वाले हैं गुमशुदगी के आंकड़े

एनसीआरबी (NCRB) 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, मिसिंग पर्सन के मामलों में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में कुल 1,26,163 लोग लापता हैं, जिनमें 89,052 महिलाएं और 36,811 पुरुष शामिल हैं। पिछले कई वर्षों से गायब इन लोगों का पता लगाने के लिए अब पुलिस की यह नई व्यवस्था एक उम्मीद जगा रही है, क्योंकि अब इन मामलों को 'अनडिटेक्टेबल' मानकर बंद करना आसान नहीं होगा।

🛡️ देश की स्थिति और राज्यों का डेटा

देश भर के आंकड़ों की बात करें तो लापता लोगों की सबसे अधिक संख्या महाराष्ट्र (करीब 1.30 लाख) में है। वहीं, साल 2024 में सबसे ज्यादा महिलाएं पश्चिम बंगाल से गायब हुई हैं। सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश इस सूची में काफी नीचे है, जहाँ मिसिंग व्यक्तियों की संख्या 30,147 है। सुप्रीम कोर्ट के इस नए निर्देश से अब पूरे देश में लापता लोगों के मामलों की जांच और निगरानी में एकरूपता आने की उम्मीद है।

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