चांदी की चमक पड़ी फीकी! इस साल अब तक 23% तक गिरे दाम, क्या खरीदारी का यही सही समय है?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के दामों में भारी गिरावट आई है। जानिए क्या चांदी खरीदने का यह सही समय है और बाजार विशेषज्ञों की निवेशकों के लिए क्या सलाह है।
चांदी की चमक आजकल कुछ फीकी सी पड़ती नजर आ रही है। इस साल अब तक इसके दामों में 23 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट आ चुकी है। अकेले जून के महीने की बात करें तो चांदी 22 प्रतिशत तक टूट गई है। जनवरी के महीने में जो चांदी 121 डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर कारोबार कर रही थी, वह अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में लुढ़ककर 58 डॉलर के आसपास आ गई है। यदि भारत की बात करें तो यहाँ भी इसका भाव लगभग 2 लाख 20 हजार रुपये प्रति किलो चल रहा है। ऐसे में देश के हर छोटे-बड़े निवेशक के मन में एक ही बड़ा सवाल चल रहा है कि क्या मौजूदा समय में चांदी खरीदना सही फैसला है, या फिर अभी कीमतों में और गिरावट का इंतजार करना चाहिए?
📉 आखिर अचानक क्यों गिरने लगे हैं चांदी के दाम?
चांदी के लगातार सस्ते होने के पीछे सबसे बड़ा कारण खाड़ी देशों में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की स्थिति है। ईरान युद्ध के कारण महत्वपूर्ण ‘हर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) वाले समुद्री मार्ग पर तेल के बड़े-बड़े जहाज फंसे हुए हैं।
इस वजह से कच्चे तेल की ग्लोबल सप्लाई पर गहरा असर पड़ा है, जिसके चलते इसके दाम तेजी से ऊपर जा रहे हैं। फिलहाल कच्चा तेल 86 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहा है, जो युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले काफी ज्यादा है। जब-जब कच्चा तेल महंगा होता है, पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ती है, और इसी महंगाई का सीधा और नकारात्मक असर सोने-चांदी के बाजार पर देखने को मिलता है।
🇺🇸 अमेरिका की मौद्रिक नीतियां और डॉलर की मजबूती कैसे डाल रही हैं असर
दुनिया भर में कच्चे तेल और कीमती धातुओं का व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में ही किया जाता है। तेल महंगा होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मांग तेजी से बढ़ती है और वह मजबूत होता है।
दूसरी तरफ, अमेरिका का केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) देश में बढ़ती महंगाई पर लगाम कसने के लिए ब्याज दरों में फिर से बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रहा है। वर्तमान में वहाँ ब्याज दरें 3.5 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में हैं, लेकिन सितंबर के महीने में इनके और अधिक बढ़ने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो वैश्विक निवेशक सोने और चांदी जैसे एसेट्स से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी डॉलर में निवेश करने लगते हैं। डॉलर की इसी जबरदस्त मजबूती के कारण चांदी पर लगातार दबाव बना हुआ है और इसकी कीमतें नीचे आ रही हैं।
📊 बाजार में मांग और उठा-पटक का मौजूदा हाल क्या है?
सोने के मुकाबले चांदी के बाजार में हमेशा से ही ज्यादा उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिलता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि चांदी का वैश्विक बाजार सोने की तुलना में काफी छोटा (लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर) है, जिसकी वजह से इसमें सट्टेबाजी (Speculation) आसानी से हो जाती है।
इस साल जनवरी में रिकॉर्ड बनाने के बाद अकेले मई के महीने में ही चांदी के दाम 40 प्रतिशत तक क्रैश हो गए थे। हालांकि, इस बीच एक सकारात्मक बात यह है कि उद्योगों (Industries) में चांदी की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों और डेटा सेंटर्स के निर्माण में इसका जमकर उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल 2026 में भी चांदी की कुल सप्लाई उसकी मांग के मुकाबले लगभग 46 मिलियन औंस कम रहने वाली है।
💡 समझदार निवेशकों को अब क्या कदम उठाना चाहिए?
अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या आपको मौजूदा समय में चांदी में निवेश करना चाहिए? बाजार के तमाम बड़े जानकारों का मानना है कि फिलहाल बाजार में ऐसा कोई भी बड़ा ट्रिगर मौजूद नहीं है जो चांदी की कीमतों में रातों-रात अचानक तेजी ला सके।
जब तक सितंबर में अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने का डर पूरी तरह खत्म नहीं होता या फिर कच्चे तेल के दाम नीचे नहीं आते, तब तक चांदी इसी दायरे के आसपास सुस्त बनी रह सकती है। यदि आप इस समय निवेश करना चाहते हैं, तो हमेशा अपनी कुल बचत का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा ही सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं में लगाएं। किसी भी स्थिति में कर्ज लेकर या उधार के पैसों से निवेश करने की भूल बिल्कुल न करें। इसके अलावा, सारा पैसा एक साथ एक ही बार में लगाने के बजाय, थोड़ा-थोड़ा करके लंबी अवधि (Long-term) के लिए ही निवेश करने की रणनीति अपनाएं।
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