मैहर में नपा अध्यक्ष की जगह मंच पर बैठे पति, प्रभारी मंत्री राधा सिंह ने सरेआम टोका; भाषण के बाद चर्चा गर्म

मैहर में प्रभारी मंत्री राधा सिंह ने मंच पर नगर पालिका अध्यक्ष की जगह उनके पति के बैठने पर तीखी नसीहत दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि महिला जनप्रतिनिधियों को केवल चुनाव तक सीमित न रखें, उन्हें काम करने का पूरा अवसर दें।

Jul 20, 2026 - 18:12
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मैहर में नपा अध्यक्ष की जगह मंच पर बैठे पति, प्रभारी मंत्री राधा सिंह ने सरेआम टोका; भाषण के बाद चर्चा गर्म

मैहर। मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध मां शारदा नगरी मैहर में रविवार को आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं प्रदेश की प्रभारी मंत्री राधा सिंह ने एक अनूठी नजीर पेश की. कार्यक्रम के दौरान जब मंत्री राधा सिंह को संबोधन के लिए मंच पर बुलाया गया, तो उन्होंने वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान एक बेहद गंभीर विषय की ओर खींचा. महिला सशक्तिकरण को लेकर मंत्री ने मंच पर मौजूद नगर पालिका अध्यक्ष के पति को मंच से ही सार्वजनिक रूप से नसीहत दे डाली. मंत्री की इस बेबाक टिप्पणी को सुनकर जहां एक ओर मंच पर बैठे सभी लोग मुस्कुराने लगे, वहीं दूसरी ओर मंत्री ने महिलाओं को चारदीवारी से बाहर निकलकर नेतृत्व संभालने की मजबूत सलाह दी.

मैहर में कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में प्रभारी मंत्री राधा सिंह मंच पर मौजूद सभी गणमान्य अतिथियों का नाम लेकर उनका अभिवादन कर रही थीं. इसी दौरान उन्होंने देखा कि मंच पर नगर पालिका अध्यक्ष की जगह उनके पति संतोष सोनी बैठे हुए हैं. इस पर मंत्री ने चुटकी लेते हुए और सवाल पूछते हुए कहा, "सरपंच के पति को तो 'सरपंच पति' (सपा) नाम से बुलाते हैं, लिहाजा आपको मैं किस नाम से संबोधित करूं?"

यह सुनते ही दीर्घा में बैठे सभी लोग हंसने लगे और नगर पालिका अध्यक्ष के पति ने मुस्कुराते हुए कहा कि आपको तो सब पता है. इसके बाद मंत्री राधा सिंह ने गंभीर रुख अपनाते हुए कहा:

प्रभारी मंत्री राधा सिंह का आधिकारिक वक्तव्य:

"जब किसी महिला को क्षेत्र की जनता ने अपना बहुमूल्य वोट देकर चुनकर अध्यक्ष बनाया है, तो ऐसे में सभी सार्वजनिक और शासकीय कार्यक्रमों में भी वही मौजूद रहें. सभी कार्यक्रमों में उनका दिखना और सक्रिय होना बेहद अनिवार्य है. महिलाओं को केवल चुनाव जिताने और मोहरा बनाने तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने संवैधानिक अधिकार और प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने का पूरा अवसर मिलना चाहिए, जिससे कि वे आगे आकर समाज का वास्तविक प्रतिनिधित्व कर सकें."

इस पूरे घटनाक्रम और मंत्री द्वारा उठाए गए प्रशासनिक व सामाजिक मुद्दों को नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझा जा सकता है:

मुख्य प्रसंग वास्तविक स्थिति (मंच पर) प्रभारी मंत्री की स्पष्ट टिप्पणी व निर्देश
जनप्रतिनिधि की उपस्थिति नपा अध्यक्ष गीता सोनी की जगह उनके पति संतोष सोनी मंच पर थे. निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि को ही हर सार्वजनिक कार्यक्रम में आगे रहना चाहिए.
प्रशासनिक संदेश 'सरपंच पति' या 'अध्यक्ष पति' संस्कृति पर सीधा प्रहार. जनता ने जिसे चुना है, वही अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करे, कोई दूसरा नहीं.
महिला सशक्तिकरण महिलाओं को केवल कागजों या चुनाव तक सीमित रखने का विरोध. महिलाओं को अपने अधिकारों को स्वयं पहचानने और घर से बाहर निकलने की सलाह.
जनता की प्रतिक्रिया भाषण के बाद स्थानीय स्तर पर गहरा विमर्श शुरू हुआ. इसे महिला जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी के लिए एक बड़ा और स्पष्ट संदेश माना गया.

प्रभारी मंत्री राधा सिंह ने रूढ़िवादी राजनीतिक व्यवस्था पर प्रहार करने के लिए खुद का ही उदाहरण मंच के सामने पेश किया. उन्होंने कहा कि यदि मैं खुद कैबिनेट मंत्री हूँ और मैं अपनी जगह पर अपने पति को किसी प्रभारी जिले की बैठक या शासकीय दौरे पर भेजकर यह कह दूँ कि वे मंत्री की जिम्मेदारियां निभाएं, तो क्या वह प्रशासनिक और कानूनी रूप से सही रहेगा?

उन्होंने कहा कि ऐसा बिल्कुल भी संभव नहीं है. जिस व्यक्ति को जनता ने अपने प्रतिनिधित्व के लिए चुना है, वही सार्वजनिक रूप से अपनी जवाबदेही और जिम्मेदारियों का निर्वहन करे. उनकी अनुपस्थिति में उनकी जगह किसी भी अन्य बाहरी व्यक्ति को वीआईपी मंच पर या प्रशासनिक कार्यों में दखल देने का अधिकार नहीं होना चाहिए.

राज्यमंत्री ने सीधे मंच से ही भाजपा नेता और नपा अध्यक्ष के पति संतोष सोनी को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपनी पत्नी गीता सोनी को प्रशासनिक कार्यों में आगे आने दें. उन्होंने कहा, "आप उनके अधिकारों का सम्मान करें. सरकार ने महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में लाने और सशक्त बनाने के लिए 50 फीसदी का आरक्षण और नेतृत्व का सुनहरा अवसर दिया है, जिससे कि वे आगे बढ़ सकें और देश-प्रदेश का नाम रोशन कर सकें. इसलिए उनके स्थान पर किसी भी अन्य पुरुष या रिश्तेदार को आगे नहीं आना चाहिए."

प्रभारी मंत्री राधा सिंह की इस बेबाक और स्पष्ट टिप्पणी के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों और राजनीतिक गलियारों में यह बात पूरे दिन मुख्य चर्चा का विषय बनी रही. कई प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे महिला जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार का एक बेहद स्पष्ट और कड़ा संदेश माना है. इस नसीहत के बाद जहां मैहर में महिलाओं को प्रशासनिक तौर पर बढ़ावा देने की ओर फोकस बढ़ गया है, वहीं दूसरी ओर इस पूरे मामले पर अभी तक नगर पालिका अध्यक्ष गीता सोनी और उनके पति संतोष सोनी का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

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