Sendhwa नगर परिषद पलसूद के राजस्व अधिकारी और सीएमओ के खिलाफ जबलपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति को पत्र किया मेल
पलसूद नगर परिषद से जुड़ा है मामला
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया - बसपा जॉन प्रभारी बालकृष्ण बाविस्कर ने
सेंधवा । बड़वानी जिले के पलसूद नगर परिषद के राजस्व अधिकारी एवं सीएमओ के खिलाफ बसपा जॉन प्रभारी बालकृष्ण बाविस्कर ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत को एक पत्र *ईमेल*किया है । जिसमें उन्होंने उल्लेख किया है कि पलसूद नगर परिषद के सीएमओ राजेंद्र शर्मा की हटधर्मिष्ठा तथा अस्पृश्यता एवं जातिवादी मानसिकता के कारण पलसूद निवासी कैलाश शर्मा और उनके परिवार को जो कि अनुसूचित जाति वर्ग के हैं, उन्हें पिछले दो महीने से पीने के पानी से वंचित किया गया है। कैलाश वर्मा के अनुसार उन्हें जल कर भरने का नोटिस प्राप्त हुआ था। जिसके आधार पर उन्होंने उसका भुगतान कर दिया है। बावजूद उनके कनेक्शन को काट दिया गया है। इसको लेकर उन्होंने कलेक्टर की जनसुनवाई बड़वानी में भी आवेदन दिया था। लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। तब कैलाश वर्मा जॉन प्रभारी बालकृष्ण बाविस्कर के पास गए। तब दोनों कलेक्टर बडवानी गुंजा सनोबर से निवेदन किया। लेकिन निवेदन के पश्चात अभी तक कुछ भी कार्यवाही नहीं हुई। इसको लेकर बाविस्कर पीडित पक्ष को लेकर 5 मार्च 2025 को पुराने कलेक्टर बडवानी के सामने एकदिवसीय जल सत्याग्रह एवं धरना किया और रैली के माध्यम से कलेक्टर को ज्ञापन देने पहुंचे। जिसको स्वीकार बड़वानी तहसीलदार ने किया। फिर भी अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। इसलिए बाविस्कर ने 20 मार्च 2025 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को एक पत्र लिखा है। और उसको जनहित याचिका में स्वीकार करने का निवेदन भी किया है। जॉन प्रभारी ने यह भी बताया कि आज ही के दिन 25 मार्च 1927 को संविधान निर्माता डॉक्टर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने महाराष्ट्र के महाड़ में जल सत्याग्रह किया था। क्योंकि उस दौरान मनुवादी सामाजिक व्यवस्था ने सार्वजनिक स्थान पर जीव जंतु पशु जहां तक की कुत्ते तक को पानी पीने का अधिकार दिया था। किंतु महार जाति को नहीं जो कि आज अनुसूचित जाति में है तो बाबा साहब ने चौदार तालाब सत्याग्रह करके सभी को जीवन जीने का अमूल्य अधिकार दिया था। जिसकी स्थाई व्यवस्था भारतीय संविधान के *भाग 3* में
मौलिक अधिकार मौलिक अनुच्छेद 21 में की गई है। लेकिन अभी तक जल के अधिकार से जीते इसके सनी की जाना चाहिए ऐसा निवेदन उन्होंने जबलपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की है।
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