छिंदवाड़ा में ₹44 लाख का गेहूं घोटाला; कागजों में हुई खरीदी, गोदामों से 1,836 क्विंटल अनाज गायब

छिंदवाड़ा जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं में ₹44.52 लाख के घोटाले का खुलासा हुआ है। 39 समितियों से 1,836 क्विंटल गेहूं गोदाम तक नहीं पहुंचा, जिसके बाद नागरिक आपूर्ति निगम ने वसूली के नोटिस जारी किए हैं।

Jul 20, 2026 - 18:15
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छिंदवाड़ा में ₹44 लाख का गेहूं घोटाला; कागजों में हुई खरीदी, गोदामों से 1,836 क्विंटल अनाज गायब

छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा गया करीब 1,800 क्विंटल से अधिक गेहूं सरकारी गोदामों तक नहीं पहुंचा है. यह गेहूं या तो रास्ते में ही पार कर दिया गया या फिर इसकी फर्जी तरीके से केवल कागजों पर ही खरीदारी दिखाई गई थी. फिलहाल, जांच टीम इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. सरकारी दस्तावेजों में तो यह गेहूं दर्ज है, लेकिन भौतिक सत्यापन के दौरान गोदामों में यह अनाज गायब मिला. प्राथमिक अनुमान के अनुसार, इस पूरे मामले में करीब ₹44.52 लाख का घोटाला सामने आया है.

गेहूं उपार्जन के दौरान सहकारी समितियों द्वारा की गई खरीदी और उसके बाद नागरिक आपूर्ति निगम तक परिवहन (Transport) के दौरान भारी गड़बड़ी पाई गई है. जांच में जिले की 39 समितियों से 1 हजार 836 क्विंटल गेहूं शॉर्टेज (कम) मिलने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है. इस गायब अनाज की कुल सरकारी कीमत ₹44,52,000 आंकी गई है. नागरिक आपूर्ति निगम ने लापरवाही बरतने वाली संबंधित समितियों और परिवहनकर्ताओं (Transporters) को कारण बताओ नोटिस जारी कर वसूली की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है.

इस सीजन में हुए गेहूं उपार्जन और उसमें पाई गई विसंगतियों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:

उपार्जन के मुख्य बिंदु आधिकारिक आंकड़े व विवरण
कुल बनाए गए खरीदी केंद्र 84 केंद्र (सत्र 2025-26)
निर्धारित समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,425 प्रति क्विंटल
कुल पंजीकृत किसान 29,585 किसान
उपार्जन केंद्रों पर बेचा गया कुल गेहूं 16,306 किसानों द्वारा 13,25,173 क्विंटल
जांच में गायब पाया गया गेहूं (Shortage) 1,836 क्विंटल (39 समितियों से)
घोटाले की अनुमानित कुल राशि ₹44,52,000 (लगभग ₹44.52 लाख)

जांच दल को जिन खरीदी केंद्रों और समितियों के स्टॉक में गेहूं कम मिला है, उनकी सूची काफी लंबी है. इसमें मुख्य रूप से चांद, कुंडालीकला, समसवाड़ा, कारीडोंगरी, छुई, कपुर्दा, गोपालपुर, अमरवाड़ा, मेघदौन, घोघरी, गांगीवाड़ा, परसगांव, चावलपानी, लिखड़ी-खटकर, पंचगांव, रामगढ़, छिंदीकामथ, मानकादेही खुर्द, पलटवाड़ा, पाधरी, सेजा, कुंडा, बसुरियाकला, देलाखारी, देवरी, पगारा, झुर्रे, बटकाखापा, मोरडोंगरी, खमारपानी, चौरई, कपरवाड़ी, सारोठ, साजपानी, जुन्नारदेव, तामिया, मारई, घानाउमरी और गोरेघाट समितियां शामिल हैं. इन सभी केंद्रों पर दर्ज स्टॉक और गोदाम पहुंचे स्टॉक में भारी अंतर है.

नियम के मुताबिक, सहकारिता विभाग किसानों से गेहूं की खरीदी करने के बाद उसे सुरक्षित भंडारण के लिए नागरिक आपूर्ति निगम को सौंपता है. लेकिन इस बार जितने गेहूं की कागजी खरीदी हुई, उतना अनाज नागरिक आपूर्ति विभाग के गोदामों तक पहुंचा ही नहीं, जिससे दोनों विभाग आमने-सामने आ गए हैं.

दूसरी ओर, इस बड़ी कार्रवाई से बचने के लिए सहकारी समिति के कुछ प्रबंधकों ने बेहद अजीबोगरीब तर्क दिए हैं. उनका कहना है कि खरीदे गए अनाज को केंद्रों से गोदामों में शिफ्ट करने के दौरान बोरियां फटने से अनाज बिखर जाता है. साथ ही, लंबे समय तक खुले में अनाज रखने से वह सूख जाता है, जिसके कारण उसके प्राकृतिक वजन में कमी आ जाती है. हालांकि, प्रशासन इस तर्क से संतुष्ट नहीं है और विस्तृत जांच जारी है.

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