भोपाल में आउटसोर्स बिजली कर्मचारियों का बड़ा प्रदर्शन, मुख्यमंत्री से समय देने की मांग
मध्य प्रदेश के आउटसोर्स बिजली कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर भोपाल में प्रदर्शन किया है। मुख्यमंत्री से समय देने और नीति लागू करने की मांग की गई है।
भोपाल। मध्य प्रदेश विद्युत कर्मचारी संगठन के बैनर तले राज्य के तमाम आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी लंबे समय से लंबित पड़ी विभिन्न मांगों को पूरा करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात करने के लिए समय देने की मांग की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिवनारायण राजपूत के नेतृत्व में रविवार को प्रदेशभर से हजारों की संख्या में कर्मचारी राजधानी भोपाल पहुँचे और अपना विरोध दर्ज कराते हुए ज्ञापन सौंपा।
✊ भोपाल के आंबेडकर मैदान में जुटा कर्मचारियों का सैलाब, किया धरना-प्रदर्शन
रविवार को भोपाल के ऐतिहासिक आंबेडकर मैदान में अपनी मांगों के समर्थन में विशाल धरना देने के लिए हजारों की संख्या में कर्मचारी एकत्रित हुए।
यहाँ प्रदेश के कोने-कोने से पहुँचे कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न जायज मांगों को लेकर बुलंद आवाज में सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया। संगठन के पदाधिकारियों ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि कर्मचारियों की गंभीर समस्याओं को लेकर पूर्व में अपर मुख्य ऊर्जा सचिव तथा ऊर्जा मंत्री के साथ उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन दोनों ही बैठकों में केवल कोरे आश्वासन मिलने के बावजूद धरातल पर मांगों का कोई निराकरण न होने के कारण अब कर्मचारियों में भारी नाराजगी और असंतोष व्याप्त है।
📋 समस्याओं का नहीं हुआ निराकरण, हरियाणा की तर्ज पर नीति लागू करने की मांग
संगठन ने प्रमुख रूप से यह मांग उठाई है कि प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारियों को संविदा कर्मचारी का आधिकारिक दर्जा दिया जाए और उन्हें भी समान सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। इसके अलावा, पड़ोसी राज्य हरियाणा की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी 'आउटसोर्स सेवा सुरक्षा नीति' तुरंत लागू की जाए।
कर्मचारियों की अन्य प्रमुख मांगों में सीधी परीक्षा के माध्यम से नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करना, सेवा के अनुभव के आधार पर बोनस अंक देना, जोखिम भत्ता बढ़ाकर तीन हजार रुपये करना और अन्य प्रशासनिक अड़चनों का शीघ्र निराकरण शामिल है।
💰 दुर्घटना में मृत्यु पर 50 लाख मुआवजा और अन्य कई बड़ी मांगें
सौंपे गए ज्ञापन में कंप्यूटर ऑपरेटरों को उच्च कुशल (High Skilled) श्रेणी में शामिल किए जाने की पुरजोर मांग की गई है। इसके साथ ही निम्नलिखित प्रमुख मांगें भी रखी गई हैं:
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विद्युत दुर्घटना में कार्यरत कर्मचारी की मृत्यु होने पर 50 लाख रुपये तथा अन्य सामान्य परिस्थितियों में कम से कम 20 लाख रुपये की बीमा सहायता राशि दी जाए।
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मृतक कर्मचारी के आश्रित पारिवारिक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति (नौकरी) दी जाए।
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राष्ट्रीय अवकाश के त्योहारों और रात्रिकालीन (Night Shift) ड्यूटी के लिए अतिरिक्त पारिश्रमिक का भुगतान किया जाए।
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ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में घायल होने पर तुरंत आर्थिक सहायता और पूरे प्रदेश में शत-प्रतिशत ईएसआइसी (ESIC) का लाभ लागू किया जाए।
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इसके अलावा, बोनस को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने, लंबे समय से लंबित वेतन पुनरीक्षण को लागू करने, 26 दिन के स्थान पर पूरे 30 दिन का वेतन भुगतान करने तथा कार्य अनुभव के आधार पर वरिष्ठता एवं नियमित वेतन वृद्धि देने की मांग की गई है।
संगठन ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे जल्द से जल्द कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कर इस पर कोई सकारात्मक निर्णय लें। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ही कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो इस आंदोलन को आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।
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