Gwalior News: ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाहा का दावा, प्राकृतिक खेती से 5000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा गेहूं

ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाहा ने साझा की सफलता की कहानी। प्राकृतिक खेती अपनाकर 5000 रुपये प्रति क्विंटल तक बेच रहे हैं गेहूं। किसानों के लिए बड़ा प्रेरणा स्रोत।

Jun 20, 2026 - 12:19
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Gwalior News: ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाहा का दावा, प्राकृतिक खेती से 5000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा गेहूं

ग्वालियर। मध्य प्रदेश अपनी उन्नत कृषि और विशेष रूप से 'शरबती गेहूं' के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। जहाँ सामान्यतः सरकार किसानों से 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद करती है, वहीं ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाहा अपनी खेती के अनोखे मॉडल से इसी गेहूं को 5000 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर बेच रहे हैं। सांसद ने हाल ही में ग्वालियर के बाल भवन में आयोजित 'प्राकृतिक खेती कार्यशाला' में इस सफलता का राज साझा किया।

💡 शुरुआत में थी शंका, अब मिल रहा है बंपर मुनाफा

सांसद कुशवाहा ने बताया कि शुरुआत में जब उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने का विचार किया, तो मन में कई आशंकाएं थीं। लेकिन कम लागत में अधिक और स्वास्थ्यवर्धक फसल ने उनकी सोच बदल दी। उन्होंने कहा, "बाजार में जब गेहूं का भाव 2700 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल है, तब मैंने अपने प्राकृतिक रूप से उगाए गए गेहूं को 5000 रुपये प्रति क्विंटल के दाम पर बेचा है, और अभी भी भारी डिमांड बनी हुई है।" उन्होंने किसानों से अपील की कि वे रसायनों का मोह छोड़कर जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें।

🚜 प्रधानमंत्री की अपील और कृषि का महत्व

मीडिया से चर्चा करते हुए सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री का मानना है कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि किसान शुद्ध अन्न का उत्पादन करेंगे, तो समाज स्वस्थ रहेगा और बीमारियाँ कम होंगी। सांसद ने जोर देकर कहा कि कृषि के बिना देश का विकास संभव नहीं है। प्राकृतिक खेती न केवल मुनाफे वाली है, बल्कि यह पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरता को भी लंबे समय तक सुरक्षित रखती है।

🐄 पशुपालन: आय का अतिरिक्त जरिया

सांसद ने केवल खेती ही नहीं, बल्कि पशुपालन को भी आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि पशुपालन न केवल घर के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया है, बल्कि इससे मिलने वाला गोबर प्राकृतिक उर्वरक के रूप में खेतों के लिए वरदान साबित होता है। रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने के लिए पशुपालन और प्राकृतिक खेती का तालमेल किसानों के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है।

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