LPG Import Strategy: पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत ने बदली एलपीजी खरीद की रणनीति, अमेरिका और ईरान से बढ़ाया इंपोर्ट

पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत ने एलपीजी आयात स्रोतों में विविधता लाकर आपूर्ति बनाए रखी। कीमतों में बढ़त और खपत में गिरावट का पूरा विश्लेषण यहाँ पढ़ें।

Jun 20, 2026 - 17:32
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LPG Import Strategy: पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत ने बदली एलपीजी खरीद की रणनीति, अमेरिका और ईरान से बढ़ाया इंपोर्ट

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए एलपीजी (LPG) खरीद के स्रोतों में बड़ा बदलाव किया है। पहले भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आयात करता था, जिसे अब अन्य देशों की ओर मोड़ा गया है। क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अब अमेरिका, ईरान, अर्जेंटीना और नीदरलैंड जैसे देशों से सप्लाई बढ़ा दी है। अप्रैल 2026 तक, भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग एक-तिहाई हो गई है।

📉 खपत में रिकॉर्ड गिरावट और सप्लाई का गणित

हालांकि नए स्रोतों से आपूर्ति मिलने से सप्लाई चेन बनी रही, लेकिन लंबी सप्लाई चेन के कारण ढुलाई खर्च (फ्रेट कॉस्ट) में काफी वृद्धि हुई। इसका असर एलपीजी की खपत पर भी पड़ा है। मई महीने में एलपीजी की खपत में 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा असर कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर पड़ा है, जहाँ कीमतों में हुई बेतहाशा वृद्धि के चलते मांग काफी कम हो गई है।

💰 तेल कंपनियों पर ‘अंडर-रिकवरी’ का भारी बोझ

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सऊदी अरामको कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में फरवरी से जून के बीच 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस महंगाई का बोझ आम नागरिकों पर न पड़े, इसके लिए सरकारी तेल कंपनियों ने बहुत कम हिस्सा ग्राहकों पर डाला। परिणामस्वरुप, मार्च-मई के दौरान फ्यूल रिटेलर्स को लगभग 22,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ा। दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 79 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि घरेलू सिलेंडर की कीमतों में महज 10 प्रतिशत का इजाफा किया गया।

🔮 भविष्य की उम्मीद: राहत की ओर बढ़ते कदम

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और मुख्य ट्रेड रूट्स के खुलने की संभावनाओं से ग्लोबल एलपीजी कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। यह संकट एक सबक है कि भारत को आयातित एलपीजी पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए घरेलू उत्पादन और खरीद स्रोतों में और अधिक विविधता लाने की आवश्यकता है। हालांकि सरकार ने इस स्थिति को कुशलता से संभाला है, लेकिन भविष्य के भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए ऊर्जा क्षेत्र को अधिक लचीला बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

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