Ratlam Fire Safety Failure: कलेक्ट्रेट और नगर निगम में ही नहीं है आग से सुरक्षा के इंतजाम; ऑडिट के नाम पर हो रही खानापूर्ति
रतलाम के कलेक्ट्रेट और नगर निगम में फायर सेफ्टी इंतजामों की पोल खुली। 2018 के पुराने अग्निशमन यंत्र और रिसाव वाले सिलेंडर के भरोसे दफ्तर।
रतलाम। दिल्ली और लखनऊ के भीषण अग्निकांडों के बाद पूरे देश में व्यावसायिक संस्थानों का फायर ऑडिट किया जा रहा है। रतलाम में भी प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम शहर के होटलों, अस्पतालों और कमर्शियल बिल्डिंग्स की जांच कर रही है। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि जो संस्थान दूसरों को आग से सुरक्षा के नियम सिखा रहे हैं, उनके अपने कार्यालयों में ही सुरक्षा इंतजाम भगवान भरोसे हैं।
🏛️ कलेक्ट्रेट परिसर: 2018 के यंत्र के भरोसे सरकारी सुरक्षा
ईटीवी भारत की पड़ताल में रतलाम कलेक्ट्रेट परिसर की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। तीन मंजिला इस इमारत में, जहाँ दर्जन भर महत्वपूर्ण सरकारी विभाग संचालित होते हैं, वहां ग्राउंड फ्लोर पर केवल एक फायर एक्सटिंग्विशर मिला। चौंकाने वाली बात यह है कि इसे वर्ष 2018 में लगाया गया था और तब से अब तक न तो इसे रिफिल किया गया है और न ही इसकी जांच हुई है। ऊपरी मंजिलों पर भी गिनती के पुराने उपकरण लगे हैं, जो आपातकाल में शायद ही किसी काम आ सकें। इसके अलावा, परिसर में आने-जाने के लिए सीमित रास्तों और बेरीकेडिंग ने सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक जोखिमपूर्ण बना दिया है।
🏢 नगर निगम में भी लापरवाही का आलम
नगर निगम परिसर की स्थिति भी कुछ खास बेहतर नहीं दिखी। यहाँ हालांकि 3 अग्निशमन यंत्र जरूर मिले, लेकिन उनमें से एक का प्रेशर मीटर 'जीरो' पर था, यानी वह पूरी तरह खाली हो चुका है। सबसे बड़ा खतरा एमरजेंसी एग्जिट का न होना है। आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई भी सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता नहीं है।
⚖️ क्या सबक लेगा प्रशासन?
जो संस्थान शहर की सुरक्षा की निगरानी कर रहे हैं, उनके अपने दफ्तरों में ऐसी लापरवाही न केवल प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाती है, बल्कि आने वाले बड़े खतरों को भी न्योता दे रही है। शहरवासी अब सवाल पूछ रहे हैं कि जब सरकारी कार्यालय खुद ही असुरक्षित हैं, तो वे निजी संस्थानों से नियमों के पालन की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?
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