Urad Farming Guide: कम बारिश में भी होगी बंपर कमाई; शहडोल के किसान ऐसे करें उड़द की खेती

कम बारिश में भी उड़द की खेती है एक बेहतर विकल्प। प्रति हेक्टेयर 10-12 क्विंटल पैदावार के लिए अपनाएं ये वैज्ञानिक तरीके। बुवाई, खाद और रोग प्रबंधन की पूरी जानकारी।

Jun 30, 2026 - 17:39
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Urad Farming Guide: कम बारिश में भी होगी बंपर कमाई; शहडोल के किसान ऐसे करें उड़द की खेती

शहडोल। अल नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष कम बारिश की संभावना ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसी स्थिति में कम पानी चाहने वाली फसल 'उड़द' किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति के अनुसार, उड़द न केवल कम देखरेख में तैयार होती है, बल्कि बाजार में इसकी निरंतर मांग होने के कारण यह एक 'कैश क्रॉप' के रूप में अच्छी आय प्रदान करती है।

🚜 मिट्टी का चयन और तैयारी

उड़द की खेती के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है (pH 6.5 से 7.8)।

  • मिट्टी की तैयारी: खेत की कल्टीवेटर से गहरी जुताई करें। यदि खरपतवार अधिक हो, तो रोटावेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरा और समतल बना लें।

  • बुवाई का सही समय: खरीफ सीजन में जून के अंत से जुलाई के मध्य तक का समय बुवाई के लिए सबसे सटीक है।

  • बीज दर: प्रति हेक्टेयर 15 से 17 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है। कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखें।

📊 खाद और जल प्रबंधन
  • खाद: रासायनिक खाद के बजाय सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करें, जिससे मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़े। यह एक दलहनी फसल है, इसलिए इसमें नाइट्रोजन की मांग कम होती है।

  • सिंचाई: खरीफ सीजन में वैसे भी पानी की कम आवश्यकता होती है, लेकिन फूल आते समय और फली बनते समय नमी बनाए रखना आवश्यक है। आवश्यकतानुसार 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।

🛡️ रोग और कीट प्रबंधन

उड़द की फसल में मुख्य रूप से 'पीला मोजेक वायरस' का खतरा होता है, जो सफेद मक्खी द्वारा फैलता है। इसके अलावा फली भेदक इल्लियों पर नजर रखना जरूरी है। कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव है कि फसल का समय-समय पर निरीक्षण करें और आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उचित कीटनाशकों का छिड़काव करें।

💰 आर्थिक लाभ और पैदावार

यदि वैज्ञानिक पद्धतियों का पालन किया जाए, तो किसान प्रति हेक्टेयर 10 से 12 क्विंटल तक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। बाजार में उड़द की मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे किसानों को उनके परिश्रम का उचित मूल्य प्राप्त होता है।

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