मध्य प्रदेश में 4.5 लाख पेंशनर्स का सरकार के खिलाफ मोर्चा; झील में उतरकर किया जोरदार प्रदर्शन
मध्य प्रदेश के पेंशनर्स ने 13 सूत्रीय मांगों और लंबित एरियर को लेकर सागर में किया जल सत्याग्रह। 2019 से परेशान पेंशनर्स ने सरकार को दी उग्र आंदोलन की चेतावनी।
सागर। मध्य प्रदेश के साढ़े चार लाख पेंशनर्स अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। 59 माह के लंबित एरियर और अपनी 13 सूत्रीय मांगों को लेकर सागर के पेंशनर्स ने ऐतिहासिक लाखा बंजारा झील के चकराघाट पर अनोखा 'जल सत्याग्रह' किया। कड़ाके की धूप और पानी के बीच पेंशनर्स ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी उपेक्षा पर गहरा रोष व्यक्त किया।
📢 2019 से जारी संघर्ष, सरकार पर अनदेखी का आरोप
प्रदर्शनकारी पेंशनर्स का कहना है कि वे 2019 से लगातार आर्थिक और मानसिक पीड़ा झेल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 'पेंशनर कल्याण मंडल' बनाकर केवल खानापूर्ति की है, जिसकी कोई बैठक तक नहीं बुलाई गई। पेंशनर्स ने जबलपुर हाई कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि सरकार उनके हक देने के बजाय सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रही है, जो यह दर्शाता है कि सरकार उनका वाजिब हक देने में टालमटोल कर रही है।
📋 पेंशनर्स की मुख्य मांगें
आंदोलनकारियों ने अपनी 13 सूत्रीय मांगों में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मुद्दे उठाए हैं:
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59 माह का लंबित एरियर का तत्काल भुगतान।
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पेंशनर्स के लिए प्रभावी स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करना।
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विद्युत कंपनी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशन की गारंटी।
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चतुर्थ समयमान वेतनमान का लाभ प्रदान करना।
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पेंशन का सारांशीकरण 15 साल के स्थान पर 11 साल 9 माह में करना।
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शिक्षकों की पात्रता अनुसार अर्जित अवकाश का नगदीकरण।
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ओपीएस (OPS) की बहाली और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम के तहत समिति का गठन।
⚠️ सरकार को चेतावनी: आंदोलन होगा और तेज
पेंशनर नेता हरिओम पांडे ने चेतावनी देते हुए कहा कि पूरी जिंदगी शासन की सेवा करने वाले पेंशनर्स को आज अपने ही हक के लिए सड़कों और झीलों में उतरना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो मध्य प्रदेश के साढ़े चार लाख पेंशनर्स इस आंदोलन को और उग्र करेंगे, जिसका असर आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है।
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