सरकारी गोदामों तक पहुँचने से पहले ही गायब हुआ 86 हजार क्विंटल गेहूं; 23 करोड़ का बड़ा घोटाला
मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन के दौरान 86 हजार क्विंटल गेहूं गायब होने का बड़ा घोटाला। 23 करोड़ रुपये का सरकारी अनाज गोदाम पहुंचने से पहले ही हुआ गायब।
भोपाल। मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर हुई गेहूं खरीदी के दौरान एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, किसानों से खरीदी गई गेहूं की एक बड़ी खेप वेयरहाउस तक पहुँचने से पहले ही रास्ते से गायब हो गई है। गायब हुए गेहूं की कुल मात्रा 86 हजार क्विंटल है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 23 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह मामला प्रदेश के किसी एक जिले का नहीं, बल्कि कई जिलों का है, जिससे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
📊 जिलावार गड़बड़ी का विवरण: सागर अव्वल
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत का गृह जिला सागर इस घोटाले में शीर्ष पर है, जहाँ 14 हजार क्विंटल गेहूं गायब हुआ है। अन्य प्रमुख जिलों की स्थिति इस प्रकार है:
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जबलपुर: 13,000 क्विंटल
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नर्मदापुरम: 7,300 क्विंटल
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विदिशा: 6,300 क्विंटल
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सतना: 5,000 क्विंटल
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आगर मालवा: 4,700 क्विंटल अन्य जिलों जैसे उज्जैन, राजगढ़, शाजापुर, रायसेन, रीवा, अशोकनगर और सिवनी में भी हजारों क्विंटल अनाज गायब होने की पुष्टि हुई है।
🕵️ जांच के घेरे में विभाग: क्या है अधिकारियों की भूमिका?
इस पूरे गड़बड़झाले में सहकारिता और राजस्व विभाग के अधिकारी व कर्मचारी जांच के दायरे में हैं। सहकारी समितियों के माध्यम से गेहूं की खरीदी, तुलाई और गोदाम तक परिवहन की जिम्मेदारी इन्हीं विभागों की थी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि यह घोटाला फर्जी किसानों, पटवारियों और समितियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो गायब हुए गेहूं का यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। दूसरी ओर, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने अधिकारियों से फीडबैक लेकर दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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