40 करोड़ श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारी पर सवाल; पुल, घाट और सीवरेज के काम अभी भी धीमी रफ्तार में
उज्जैन सिंहस्थ-2028 की तैयारियों की रफ्तार धीमी। 9319 करोड़ की परियोजनाओं में से अधिकतर अटकी। 40 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं का इंतजार।
उज्जैन। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शुमार 'सिंहस्थ-2028' के लिए अब दो साल से भी कम समय शेष है। सरकार ने इस आयोजन के लिए 9,319 करोड़ रुपये की 111 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, लेकिन प्रगति रिपोर्ट बेहद चिंताजनक है। दिशा (DISHA) समिति के आंकड़ों के अनुसार, अब तक मात्र 42 परियोजनाएं ही पूरी हो सकी हैं, जबकि 69 महत्वपूर्ण कार्य अभी भी निविदाओं और फाइलों के फेर में उलझे हुए हैं। अनुमान है कि इस बार सिंहस्थ में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन पहुँचेंगे, जिसके लिए समयबद्ध आधारभूत ढांचा तैयार करना एक बड़ी चुनौती है।
🏗️ बड़े प्रोजेक्ट्स का हाल: पुल, घाट और जल संवर्धन अभी भी अधूरे
प्रमुख परियोजनाओं की बात करें तो शिप्रा नदी पर 22 नए पुलों (853.46 करोड़) और 29 किलोमीटर नए घाटों (778 करोड़) का निर्माण कार्य अपेक्षित गति से नहीं चल रहा है। इसके अलावा 1,133 करोड़ की जल संवर्धन परियोजना और 1,462 करोड़ रुपये की उज्जैन-झालावाड़ फोरलेन परियोजना भी फिलहाल रफ्तार पकड़ने की जद्दोजहद में हैं। हालांकि, 284 करोड़ का यूनिटी माल 75 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है, जिसका लक्ष्य अक्टूबर-2026 तक का है। वहीं, 220 करोड़ की भगवान श्रीकृष्ण प्रतिमा और परिसर विकास का कार्य अभी शुरुआती चरणों में ही है।
⚠️ पिछली सिंहस्थ से तुलना और प्रशासनिक चुनौतियां
वर्ष 2016 की सिंहस्थ में अधिकांश प्रमुख कार्य काफी पहले पूरे कर लिए गए थे, जिससे व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त समय मिला था। इस बार टेंडर प्रक्रिया में देरी, भूमि विवाद और विभागों के बीच समन्वय की कमी जैसी समस्याएं बाधा बन रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन 69 लंबित परियोजनाओं को जल्द धरातल पर नहीं उतारा गया, तो महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधाओं और व्यवस्थाओं पर भारी दबाव पड़ना निश्चित है। समय पर बुनियादी सुविधाएं तैयार न होने से महाकुंभ की भव्यता और अनुशासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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