खजुराहो में सोमवती अमावस्या: 30 साल बाद बना दुर्लभ महासंयोग, मतंगेश्वर मंदिर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
खजुराहो के मतंगेश्वर महादेव मंदिर में सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़। 30 साल बाद बने दुर्लभ संयोग पर भक्तों ने शिवसागर तालाब में किया स्नान।
छतरपुर। सोमवती अमावस्या का पावन पर्व इस वर्ष एक दुर्लभ महासंयोग के साथ मनाया गया। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, पूरे 30 वर्षों बाद मलमास और सोमवती अमावस्या का यह अनूठा संयोग बना है। इस विशेष अवसर पर चंदेल कालीन खजुराहो के ऐतिहासिक मतंगेश्वर मंदिर सहित देश भर के शिवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने भक्ति में लीन होकर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की।
🙏 मतंगेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की उमड़ी भारी भीड़
विश्व पर्यटन नगरी खजुराहो में स्थित ऐतिहासिक मतंगेश्वर महादेव मंदिर में सुबह 4 बजे से ही भक्तों का आगमन शुरू हो गया, जो देर शाम तक जारी रहा। श्रद्धालुओं ने मंदिर के समीप स्थित प्राचीन 'शिवसागर तालाब' में आस्था की डुबकी लगाई और पवित्र स्नान के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर में दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना गया, जिसे लेकर भक्तों में काफी उत्साह देखा गया।
🎶 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंजा शिवालय
सोमवती अमावस्या के अवसर पर बुंदेलखंड की लोक परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु बुंदेली भक्ति गीत गाते हुए मंदिर पहुँचे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। खजुराहो के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र से आए श्रद्धालुओं ने 'हर-हर महादेव' के जयकारे लगाए। महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु के लिए वट वृक्ष (बरगद) की पूजा कर परिक्रमा लगाई और सुख-समृद्धि की कामना की।
📜 भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व
पंडित सौरभ तिवारी ने बताया कि सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है, जो 'सोम' यानी चंद्रमा को धारण करते हैं। इस दुर्लभ संयोग पर अभिषेक का विशेष फल मिलता है। भक्तों ने भगवान शिव का शुद्ध जल, शहद, घी, दूध और शक्कर से अभिषेक कर बेलपत्र अर्पित किए। उन्होंने बताया कि इस दिन पूजा-अर्चना से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है।
👮 सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम
भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए खजुराहो थाना प्रभारी नंदकिशोर सोलंकी ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से सुबह से ही मंदिर परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया था। श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के लिए प्रशासन द्वारा माकूल व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं, ताकि किसी को भी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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