कान्हा टाइगर रिजर्व में सीडीवी वायरस का खतरा? कोर्ट ने मांगा सभी टाइगर रिजर्व का वैक्सीनेशन डेटा
कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौतों पर एमपी हाई कोर्ट गंभीर। सरकार को सभी 9 टाइगर रिजर्व में वैक्सीनेशन और वेटरनरी डॉक्टरों के पद भरने के निर्देश।
जबलपुर। कान्हा टाइगर रिजर्व में हाल ही में हुई बाघों की मौतों और कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) की आशंका को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। गुरुवार को प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए शासन से विस्तृत जवाब तलब किया। शासन की ओर से बताया गया कि कान्हा में अब तक दो हजार कुत्तों का वैक्सीनेशन किया जा चुका है और बूस्टर डोज देने की प्रक्रिया जारी है।
📋 सभी 9 टाइगर रिजर्व पर निगरानी के निर्देश
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल कान्हा ही नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी नौ टाइगर रिजर्व में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए। कोर्ट ने निर्देशित किया है कि:
-
सभी टाइगर रिजर्व में रिक्त पड़े वाइल्ड लाइफ वेटरनरी डॉक्टरों के पद तत्काल भरे जाएं।
-
डॉग्स बर्थ कंट्रोल (DBC) की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
-
सभी क्षेत्रों में कुत्तों के वैक्सीनेशन और संक्रमण रोकथाम की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए।
📊 एक माह में 8 बाघों की मौत से बढ़ी चिंता
याचिकाकर्ता अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती ने अपनी जनहित याचिका में बताया कि अप्रैल-मई 2026 के दौरान कान्हा में बाघिन सुनैना (T-122), अमाही (T-141) और उनके चार शावकों सहित कुल आठ बाघों की मृत्यु ने वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर दिया है। सीडीवी संक्रमण की आशंका के मद्देनजर याचिका में वैज्ञानिक निगरानी, जैव-सुरक्षा (Bio-security) और पशु चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की पुरजोर मांग की गई है।
⚖️ अगली सुनवाई 17 अगस्त को
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बाघों की सुरक्षा से जुड़े वैधानिक और प्रशासनिक प्रोटोकॉल का अक्षरशः पालन होना चाहिए। हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई 17 अगस्त के लिए निर्धारित की है, जिसमें राज्य सरकार को सभी निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट सौंपनी होगी। यह आदेश मध्य प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)