क्या लिपिकीय चूक गंभीर अपराध के आरोपी को बचा सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार से मांगे मूल दस्तावेज
सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी मेमो में टाइपिंग त्रुटि और जमानत के मुद्दे पर समीक्षा शुरू की। राजा रघुवंशी हत्याकांड मामले में तकनीकी खामी का मामला।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न खड़ा हुआ है। शीर्ष अदालत इस बात की समीक्षा कर रही है कि क्या गिरफ्तारी मेमो (Arrest Memo) में हुई महज एक टाइपिंग की तकनीकी त्रुटि किसी गंभीर मामले के आरोपी को जमानत दिलाने के लिए पर्याप्त आधार हो सकती है? इस पेचीदा विषय पर विस्तृत कानूनी मंथन के लिए अदालत इसे एक बड़ी पीठ को सौंपने पर विचार कर रही है।
🕵️ मामला: राजा रघुवंशी हत्याकांड
यह पूरा मामला राजा रघुवंशी हत्याकांड से जुड़ा है, जिसमें उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी मुख्य आरोपी है। मेघालय सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर सोनम को मिली जमानत को रद्द करने की गुहार लगाई है। सरकार का तर्क है कि इस तकनीकी खामी का अनुचित लाभ उठाया गया है।
📝 क्या थी तकनीकी खामी?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को अवगत कराया कि आरोपी की गिरफ्तारी के दस्तावेजों में एक लिपिकीय चूक (Typographical Error) हुई थी। इसके तहत नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या से संबंधित धारा 103 के स्थान पर गलती से धारा 403 (संपत्ति का गबन) अंकित हो गई थी। इसी तकनीकी गड़बड़ी का लाभ उठाकर आरोपी को हाई कोर्ट से राहत मिल गई।
🏛️ अदालत का रुख और आगामी सुनवाई
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस चंद्रशेखर की पीठ ने इसे अत्यंत गंभीर माना है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में विस्तृत कानूनी व्याख्या आवश्यक है ताकि भविष्य के लिए नजीर तय की जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई आगामी मंगलवार तक टाल दी है और मेघालय सरकार को निर्देश दिए हैं कि वे गिरफ्तारी के वे मूल दस्तावेज पेश करें, जिनमें हिरासत का वास्तविक आधार दर्ज था।
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